मन्नतों के मेले में पहुंचे सीएम मोहन यादव, परंपरा के तहत मुराद पूरी होने पर राई नृत्य का करेंगे आयोजन

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अशोकनगर: करीला स्थित मां जानकी मंदिर देश भर में अपनी अलग पहचान और परंपराओं के लिए जाना जाता है. रंग पंचमी पर लगने वाले करीला मेले में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी पहुंचे. जहां उन्होंने मां का आशीर्वाद लिया. मंदिर में मन्नत पूरी होने पर यहां प्रसाद नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं को राई नृत्य कराना पड़ता है. यह परंपरा सैकड़ों साल पुरानी है.

बिना श्रीराम के मां सीता की होती है पूजा

अशोकनगर से 35 किलोमीटर दूर करीला धाम स्थित है. जहां मां जानकी का मंदिर बना हुआ है. मंदिर की विशेषता है कि यहां बगैर श्रीराम के माता सीता की पूजा होती है. इस मंदिर में माता सीता के साथ लव-कुश और महर्षि वाल्मीकि जी विराजमान हैं. बताया जाता है कि यह वही स्थान है, जहां भगवान राम, माता सीता को छोड़कर गए थे. इसी स्थान पर मां सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था.

मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु कराते हैं राई नृत्य

ऐसी किवदंती है कि इस स्थान पर करील का एक पेड़ था. इसी पेड़ के नीचे माता सीता ने लव और कुश को जन्म दिया था. इसके बाद स्वर्ग से अप्सराओं ने यहां आकर नृत्य कर बधाई गीत गए थे. इसके बाद से ही यहां की मान्यता है कि यहां कोई भी व्यक्ति संतान के लिए मन्नत मांगता है तो उसकी मुराद पूरी होती है तो इसके बाद यहां श्रद्धालु द्वारा राई नृत्य कराया जाता है. धीरे-धीरे इस स्थान को करीला के नाम से जाना जाने लगा.

देश भर से आते हैं लाखों श्रद्धालु

देशभर में मां करीला धाम को धार्मिक स्थल के रूप में माना जाता है. मां जानकी के भक्त देशभर में फैले हुए हैं. रंग पंचमी के मौके पर लाखों की संख्या में मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु यहां बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. यहां देर शाम चबूतरों पर राई नृत्य किया जाता है. इसके अलावा रंग पंचमी के मौके पर नृत्य करने के लिए यहां आस-पास के राज्यों से भी कई नृत्यांगनाएं पहुंचती हैं.

तीसरी बार जानकी धाम पहुंचे प्रदेश के मुखिया

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव इस साल भी करीला धाम पहुंचे. जहां उन्होंने पत्नी के साथ मां जानकी की पूजा अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की मंगल कामना की. मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव का यह तीसरा मौका है, जब वह रंग पंचमी के मौके पर करीला धाम पहुंचे. इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री डॉ राकेश शुक्ला भी करीला पहुंचे.