निर्माणाधीन कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ नियत समय अवधि में पूर्ण करें : मंत्री सिलावट

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भोपाल : जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा है कि विभाग के अंतर्गत निर्माणाधीन कार्यों को पूर्ण गुणवत्ता के साथ नियत समय अवधि में पूर्ण करें, जिससे जनता को इन कार्यों का समय से पूरा लाभ मिल सके. विभागीय अधिकारी समय-समय पर कार्यों का निरीक्षण करें एवं निरंतर निरीक्षण प्रतिवेदन दें. कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरती जाए।

मंत्री सिलावट ने बुधवार को मंत्रालय में जल संसाधन विभाग के कार्यों की समीक्षा की. बैठक में अपर मुख्य सचिव राजेश राजौरा, प्रमुख अभियंता, विनोद कुमार देवड़ा, मुख्य अभियंता सहित विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कार्य से संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

मंत्री सिलावट द्वारा प्रमुख रूप से नर्मदा ताप्ती कछार इंदौर, जल संसाधन विभाग उज्जैन एवं नमामि क्षिप्रे परियोजना इकाई उज्जैन में निर्माणाधीन वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की समीक्षा की गई. उन्होंने आगामी सिंहस्थ- 2028 से संबंधित विभागीय कार्यों कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना, सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना, क्षिप्रा नदी के दोनो तटो पर घाट निर्माण की विस्तृत समीक्षा कर कार्यों की प्रगति की जानकारी ली और इन सभी कार्यों को समय-सीमा में आगामी सिंहस्थ के पूर्व पूरी गुणवत्ता एवं विभागीय मापदण्ड अनुसार पूर्ण करने के निर्देश दिये।

मंत्री सिलावट द्वारा उज्जैन एवं इंदौर कछार के अंतर्गत निर्माणाधीन 14 वृहद एवं मध्यम परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। परियोजनाओं के पूर्ण होने पर उज्जैन, देवास, मंदसौर, नीमच, शाजापुर, झाबुआ, बुरहानपुर एवं धार जिले को लगभग 5 लाख 44 हजार हेक्टेयर में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। उन्होने सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा में पूर्ण किये जाने, गुणवत्ता पूर्ण कार्य किये जाने के निर्देश दिये साथ ही विभागीय वरिष्ठ अधिकारियों को इन परियोजनाओं को स्वीकृत समय सीमा में पूर्ण करने के लिये विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर प्रत्येक 15 दिन में इससे संबंधित समीक्षा किये जाने के भी निर्देश दिए।

मंत्री सिलावट द्वारा चितावद, समाकोटा बैराज, डुंगरिया बैराज, बनीहरवाखेडी बैराज, मॉं रेवा उदवहन सिंचाई परियोजना, हाट पिपलिया सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, कयामपुर सीतामऊ सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, मल्हारगढ़ दाब युक्त सूक्ष्म उदवहन सिंचाई परियोजना, रामपुरा मनासा सूक्ष्म वृहर सिंचाई परियोजना, कबूलपुर मध्यम, आहू सिंचाई परियोजना, तलवाड़ा बांध परियोजना, पांगारी, कारम मध्यम सिंचाई परियोजनाओं से सिंचाई किये जाने के लिये सार्थक प्रयास करने के निर्देश भी दिये गये।