भोपाल। मध्य प्रदेश की दो कोयला कंपनियों को कोयला खनन के साथ-साथ गैस निर्माण की भी स्वीकृति केंद्र सरकार ने प्रदान की है. सिंगरौली क्षेत्र की महान तथा गोंडबहेरा उज्जैनी पूर्व कोयला खदानें अडानी ग्रुप के स्वामित्व में हैं. इन खदानों में आगामी दो वर्षों के भीतर उत्खनन कार्य प्रारंभ होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
कोयले से बनेगी रसोई गैस
रसोई गैस निर्माण के लिए कंपनियों को पृथक संयंत्र स्थापित करने होंगे. इन संयंत्रों में निर्धारित तापमान पर कोयले का प्रसंस्करण कर गैस तैयार की जाएगी. यह पहला अवसर है जब कोयला कंपनियां स्वयं कोयले से गैस निर्माण का कार्य करेंगी. इससे गैस की आपूर्ति व्यवस्था अधिक सुगम होने की संभावना है. प्रदेश में उत्पादित कोयले की आपूर्ति राज्य सरकार के बिरसिंहपुर, अमरकंटक, सारणी तथा खंडवा स्थित विद्युत उत्पादन केंद्रों को की जाती है. इसके अतिरिक्त केंद्र सरकार के सिंगरौली, गाडरवारा और खरगोन स्थित विद्युत केंद्र भी इससे जुड़े हैं. सासन, बीना तथा एनबी विद्युत सिंगरौली जैसे बड़े संयंत्रों को भी कोयला उपलब्ध कराया जाता है।
रिलायंस मीथेन परियोजना संचालित कर रहा है
वहीं शहडोल क्षेत्र में रिलायंस द्वारा कोयला परत मीथेन परियोजना संचालित की जा रही है. लगभग 997 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैली इस परियोजना के अंतर्गत करीब 300 कुओं से प्राकृतिक गैस निकाली जा रही है. यह देश की प्रमुख अपारंपरिक ऊर्जा परियोजनाओं में से एक मानी जाती है. विशेषज्ञों के अनुसार, कोयले से गैस निर्माण की यह पहल ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और गैस आपूर्ति को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
फैक्ट
- प्रदेश की 55 कोयला खदानों में उत्पादन जारी
- कुल कोयला उपलब्धता: 24 मिलियन टन
- प्रतिदिन विद्युत खपत: 16 से 17 हजार मेगावाट









