ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव: संस्कृति और अध्यात्म का विश्वव्यापी उत्सव

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मध्यप्रदेश में आध्यात्मिक और पर्यटन क्षेत्र को एक नई दिशा देने के लिए पर्यटन मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से मध्यप्रदेश पर्यटन और पीएचडी चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के द्वारा  होटल अंजुश्री उज्जैन में बुधवार को ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है। इसका शुभारंभ केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत करेंगे। इसमें देश-विदेश के कई आध्यात्मिक गुरू, विचारक सहित 300 से अधिक महानुभाव शामिल होंगे। साथ ही मुख्य वक्ता के रूप में आध्यात्मिक गुरु गौरांग दास और देश-विदेश के कई आध्यात्मिक गुरू, विचारक सहित 300 से अधिक महानुभाव शामिल होंगे।

यह ग्लोबल स्पिरिचुअल कॉन्क्लेव आध्यात्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक विरासत का संवर्धन करने और जिम्मेदार आतिथ्य पर गहन चर्चा का एक महत्वपूर्ण मंच बनेगा। यह आयोजन न केवल पर्यटन उद्योग के लिए बल्कि उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है, जो भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को आधुनिकता के साथ जोड़कर देखना चाहते हैं। इस मंच पर भारत अपनी समृद्ध संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर सकेंगा। साथ ही उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ-2028 की तैयारियों, कॉर्पोरेट समूहों और मंदिर ट्रस्ट समूहों तक सीधी पहुंच बनेगी।  

12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व और संरक्षण पर होगी चर्चा 
कॉन्क्लेव में PHDCCI-KPMG द्वारा आध्यात्मिक पर्यटन पर तैयार की गई एक विशेष रिपोर्ट भी जारी की जाएगी, जो इस क्षेत्र के भविष्य के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करेगी। यह कॉन्क्लेव कई महत्वपूर्ण सत्रों में विभाजित है, जिनमें आध्यात्मिक पर्यटन के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। 'ज्योतिर्लिंग सर्किट' पर एक विशेष सत्र होगा, जिसमें भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों के महत्व और उनके संरक्षण पर चर्चा होगी। 'मंदिर अर्थव्यवस्थाएं' नामक सत्र में यह जाना जाएगा कि कैसे भारत के प्रमुख मंदिर जैसे तिरुपति, वैष्णो देवी और काशी विश्वनाथ मंदिर स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देते हैं। इस सत्र में महाकुंभ 2025 के उदाहरण पर भी बात की जाएगी, जिसने 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं को आकर्षित किया था।

उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति पर विशेष फोकस
इसका एक विशेष सत्र “महाकाल का मंडल: उज्जैन की आध्यात्मिक शक्ति और शहरी भविष्य” उज्जैन शहर पर केंद्रित होगा। इस सत्र में श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के महत्व, सिंहस्थ कुंभ के प्रभाव और शहरी नवाचारों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

आध्यात्मिकता और आधुनिकता का संगम
यह कॉन्क्लेव "मन, शरीर और आत्मा: नई आध्यात्मिक सीमा के रूप में कल्याण", "डिजिटल में दिव्य – आध्यात्मिकता 2.0" जैसे विषयों पर भी चर्चा करेगा। "मन, शरीर और आत्मा: नई आध्यात्मिक सीमा के रूप में कल्याण" सत्र में आयुर्वेद, योग और ध्यान जैसी भारतीय परंपराओं को पर्यटन के साथ कैसे जोड़ा जाए, इस पर विचार होगा। "डिजिटल में दिव्य" सत्र में वर्चुअल दर्शन, एआई और वीआर जैसी तकनीकों के माध्यम से आध्यात्मिकता को कैसे सुलभ बनाया जा सकता है, इस पर चर्चा होगी। कॉन्क्लेव का समापन प्रतिनिधियों को श्री महाकालेश्वर और श्री काल भैरव मंदिरों के दर्शन के साथ होगा।