मध्य प्रदेश के बजट से जागी उम्मीदें, छोटे उद्योगों को रियायत और MSME के लिए अलग नियम की मांग

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भोपाल: केंद्रीय बजट के बाद अब मध्य प्रदेश का बजट आने जा रहा है. मध्य प्रदेश का बजट 18 फरवरी को विधानसभा में पेश होगा. माना जा रहा कि इस बार प्रदेश का बजट 4.70 लाख करोड़ के करीब होगा. मध्य प्रदेश सरकार का फोकस उद्योग पर रहा है, इसलिए प्रदेश के उद्योग जगत और रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों को बजट से खास उम्मीदें हैं. उद्योगपतियों के मुताबिक उम्मीद है कि आने वाले बजट में सरकार का फोकस प्रदेश के औद्योगिक पार्क, एमएसएमई और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर होगा.

मौजूदा उद्योगों पर भी ध्यान देने की अपील

एसोसिएशन ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज (मंडीदीप) के संरक्षक राजीव अग्रवाल कहते हैं, " प्रदेश सरकार का फोकस औद्योगिकीकरण को लेकर रहा है. यही वजह है कि 2025 के बजट में सरकार ने 39 नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने और रीजनल इंडस्ट्रियल कॉन्क्लेव के जरिए निवेश बढ़ाने का लक्ष्य रखा था. आने वाले बजट में सरकार को इस गति को बनाए रखना होगा. निवेश के लिए आधारभूत ढांचा मजबूत रखना जरूरी होता है. इसलिए सरकार का बुनियादी ढांचे सड़क, औद्योगिक पार्क को विकसित करने के लिए प्रावधान करना होगा. इसके अलावा प्रदेश में चल रहे उद्योगों को भी टैक्स और बिजली बिल में रियायत दिए जाने पर विचार करना चाहिए."

ग्रामीण स्तर पर टैक्स व्यवस्था को मजबूत करने की मांग

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष आदित्य मनिया कहते हैं, "प्रदेश के टीयर 2 और टीयर 3 शहरों में लॉजिस्टिक और इंडस्ट्रियल हब को डेवलप करने के लिए इंफ्रस्ट्रक्चर पर ध्यान देना चाहिए. सरकार को अपना रिवेन्यू बढ़ाने के लिए ग्रामीण स्तर तक टैक्स की व्यवस्था को मजबूत करना चाहिए, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में विकास की गतिविधि बढ़ सकें. प्रदेश के नगरीय निकायों के आर्थिक मॉडल को मजबूत करने पर सरकार को गंभीरता से विचार करना होगा. प्रदेश के अधिकांश नगरीय निकाय घाटे में चल रहे हैं. इसका असर स्थानीय सुविधाओं पर दिखाई देता है."

'छोटे एमएसएमई के लिए अलग नियम बनें'

गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय गौर बताते हैं, "सरकार मौजूदा औद्योगिक क्षेत्रों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही. सरकार को गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार पर ध्यान देना चाहिए. सरकार पिछले 5 सालों के दौरान सबसे तेज ग्रोथ करने वाले एमएसएमई को प्राथमिकता दे. सरकार को 10 करोड़ से टर्नओवर वाले एमएसएमई यूनिट के लिए नियमों में लचीलापन लाना होगा. 500 करोड़ के टर्नओवर वाले उद्योगों को एमएसएमई के रूप में 10-15 करोड़ वाले टर्नओवर वाली कंपनियों से तुलना नहीं की जानी चाहिए. छोटे उद्योगों को सरकार राहत दे."

'पंजीयन शुल्क घटाए सरकार'

क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह कहते हैं कि "प्रदेश के बड़े शहरों के विकास को लेकर सरकार को फोकस बढ़ाना होगा. प्रदेश में यूथ पढ़ने और नौकरी के लिए लगातार बाहर जा रहा है. केन्द्र सरकार ने अपने बजट में इकोनॉमिक रीजन के लिए 5 हजार करोड़ दिए जाने का प्रावधान किया है. राज्य सरकार को इसको लेकर ज्यादा से ज्यादा बजट के लिए कोशिश करने चाहिए."

 

 

    उन्होंने आगे कहा, "देखा जाए तो किसी भी राज्य के लिए उसकी राजधानी उसका चेहरा होती है. राजधानी भोपाल का वैसा विकास नहीं हुआ है जैसा दूसरे राज्यों की राजधानी का हुआ है. राजधानी भोपाल का मास्टर प्लान ही सरकार अब तक नहीं ला सकी. सरकार को तत्काल मास्टर प्लान लाना चाहिए. मेट्रोपॉलिटन सिटी के हिसाब से इसमें बाद में संशोधन किए जा सकते हैं. प्रदेश में बड़े प्लेयर्स को लाने के लिए सरकार नई टाउनशिप पॉलिसी लेकर आई है, लेकिन छोटे रियल एस्टेट कारोबारियों को राहत देने के लिए सरकार को गाइडलाइन में कमी करनी चाहिए, साथ ही पंजीयन शुल्क में भी कमी होनी चाहिए. इससे जमीनों के सौंदो में बढ़ोतरी होगी."