सलूंबर में रहस्यमयी बीमारी का कहर, 8 दिन में 8 मासूमों की मौत से दहशत

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सलंबूर | उदयपुर संभाग के सलूंबर जिले में रहस्यमयी बीमारी का कहर जारी है और इसके चलते 8 दिनों में 8 बच्चों की मौत हो चुकी है, जिससे गांव के लोगों में दहशत का माहौल बना हुआ है। हालांकि, मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है।

झल्लारा और लसाड़िया क्षेत्रों में बिमारी का सबसे ज्यादा असर

सबसे ज्यादा असर झल्लारा और लसाड़िया क्षेत्रों में देखा जा रहा है, जहां 24 घंटे के भीतर बच्चों की हालत बिगड़ रही है। मंगलवार को दो अलग-अलग गांवों से परिजन साढ़े 4 साल और 2 महीने के बच्चों को अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन जांच में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं, बुधवार को 2 साल 2 महीने के एक और बच्चे की मौत हो गई। परिजनों के अनुसार, बच्चों को पहले उल्टी-दस्त की शिकायत हुई, इसके बाद तेज बुखार और घबराहट शुरू हो गई। कुछ ही समय में शरीर जकड़ने लगा और हालत तेजी से बिगड़ गई।

CMHO डॉ. महेंद्र कुमार ने क्या बताया?

मामले की गंभीरता को देखते हुए CMHO डॉ. महेंद्र कुमार परमार ने बताया कि कई बच्चों को अस्पताल मृत अवस्था में ही लाया गया। झल्लारा के आमलोदा गांव निवासी 4.5 वर्षीय रौनक को भी परिजन मृत हालत में अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहीं, लसाड़िया क्षेत्र में 2 महीने के बच्चे को पहले निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन सुधार नहीं होने पर सरकारी अस्पताल लाने पर उसे भी मृत घोषित कर दिया गया।

जयपुर और उदयपुर से पहुंची टीम कर रही जांच

स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर जांच कर रही हैं। अब तक 500 से ज्यादा परिवारों का सर्वे किया जा चुका है। इस दौरान करीब 20 बच्चों में हल्के बुखार के लक्षण पाए गए, जिन्हें दवा देकर निगरानी में रखा गया है। जयपुर और उदयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भी मौके पर पहुंचकर बीमारी के कारणों की जांच कर रही है।

1 से 6 अप्रैल के बीच 5 बच्चों की मौत

बताया जा रहा है कि 2 से 4 साल के बच्चों पर इसका ज्यादा असर देखा जा रहा है। 1 से 6 अप्रैल के बीच 5 बच्चों की मौत हो चुकी थी, जिनमें 2 सगे भाई भी शामिल थे। सभी बच्चों में एक जैसे लक्षण बुखार, उल्टी और दस्त देखने को मिले और 24 घंटे के भीतर उनकी मौत हो गई। ये बच्चे लसाड़िया क्षेत्र के लालपुरा और घाटा गांव के निवासी थे।

जिला प्रशासन अलर्ट

लगातार हो रही मौतों के बाद जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग अलर्ट मोड पर है। गांवों में निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की जा रही है। हालांकि, बीमारी के सटीक कारणों का अभी तक खुलासा नहीं हो पाया है।