1050 किमी तक पीछा कर दबोचे गए आरोपी, एसआईटी ने 86 दिन बाद मिर्जापुर से पकड़ा

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वाराणसी। कमिश्नरेट की एसआईटी ने कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी के मुख्य आरोपी शुभम जायसवाल के पांच खास सहयोगियों दिवेश जायसवाल, अमित जायसवाल, अंकुश सिंह, घनश्याम और अभिनव कुमार यादव को रविवार की सुबह भोरसर लिंक रोड मिर्जापुर से गिरफ्तार कर लिया। 15 नवंबर 2025 को कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एसआईटी 86 दिन से आरोपियों के पीछे लगी थी।

ऐसे हुई आरोपियों की गिरफ्तारी

दिवेश और अमित को वाराणसी से 1050 किलोमीटर दूर हिमाचल प्रदेश से ट्रैक किया था। कुछ दिन बाद आरोपियों की लोकेशन 240 किमी दूर मध्य प्रदेश में मिली। जब तक गिरफ्तारी के लिए टीम मध्य प्रदेश पहुंचती तब तक आरोपियों ने ठिकाना बदल लिया था। इस बीच मिर्जापुर के भोरसर लिंक रोड के पास सटीक लोकेशन मिली और दबिश देकर पांचों आरोपियों को दबोच लिया गया। वाराणसी से भोरसर लिंक रोड की दूरी 67 किलोमीटर है। 

तीन पर 25-25 हजार का घोषित था इनाम

गिरफ्तार अमित जायसवाल, दिवेश जायसवाल और अंकुश सिंह पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। दिवेश, अमित जायसवाल समेत कुछ अन्य आरोपियों की अग्रिम जमानत अर्जी पर दो दिन बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई होनी थी लेकिन पुलिस ने पहले ही गिरफ्तार कर लिया। मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, लोकेशन डेटा, बैंक ट्रांजैक्शन, सीसीटीवी फुटेज और गुप्त सूचनाओं के आधार पर साफ हुआ कि आरोपी लगातार लोकेशन बदल रहे थे। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों को वाराणसी लाया गया। 
पूछताछ के बाद मेडिकल परीक्षण कराया गया, फिर रिमांड मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया जहां से अदालत ने आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि पांचों आरोपियों ने शैली ट्रेडर्स के साथ 50 करोड़ रुपये का कारोबार किया। साथ ही कमीशन के तौर पर 10 करोड़ रुपये का लाभ लिया। आरोपी ही कफ सिरप की सप्लाई चेन, रुपयों के लेनदेन, बांग्लादेश और नेपाल बॉर्डर से जुड़ी लॉजिस्टिक्स को संभालते थे। डीसीपी काशी जोन गौरव बंशवाल ने बताया कि आरोपियों ने कबूल किया कि वे नेपाल भागने की योजना बना चुके थे। नेपाली करेंसी का इंतजाम भी कर लिया था। आरोपियों के पास से विदेशी मुद्रा से जुड़े दस्तावेज, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, नकद और लेनदेन से जुड़े कई दस्तावेज मिले हैं।पुलिस की जांच में सामने आया कि गिरोह ने रांची की शैली ट्रेडर्स के जरिये करीब 50 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। फार्मा कंपनियों से कफ सिरप की सप्लाई दिखाकर उसे अवैध तरीके से अलग-अलग राज्यों में साथ ही बांग्लादेश भेजा गया। कागजों में दवा की वैध बिक्री दिखाई जाती थी लेकिन हकीकत में यह सिरप नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।

इन फर्मों ने कागज पर किया करोड़ों के कफ सिरप का कारोबार
अमित जायसवाल ने श्री हरि फार्मा एंड सर्जिकल एजेंसी के जरिये 6.41 लाख शीशियों की खरीद-बिक्री दिखाई।
दिवेश जायसवाल ने डीएसए फार्मा के जरिये 5.97 लाख शीशियों की खरीद-बिक्री की।
अभिनव यादव ने खाटू फार्मा के जरिये 2.26 लाख कफ सिरप की शीशियां खरीदीं-बेचीं।
घनश्याम मौर्य ने श्रीराम फार्मा के जरिये 3.09 लाख शीशियों की खरीद-बिक्री दिखाई।
अंकुश सिंह ने महाकाल मेडिकल स्टोर से 5.21 लाख शीशियों की खरीद-बिक्री की। 
थाईलैंड और यूएई की करेंसी भी बरामद

पुलिस के मुताबिक, नेपाली और थाईलैंड की करेंसी की बरामदगी इस बात की तस्दीक कर रही है कि आरोपी नेपाल या थाईलैंड भागने के फिराक में थे इसके लिए विदेशी रुपये एक्सचेंज कराए थे। पुलिस रने 1300 रुपये की नेपाली करेंसी, थाईलैंड की मुद्रा 18890 बाट और यूएई के पांच दिरहम की बरामदगी दिखाई है जिनकी कीमत भारतीय रुपये में 55 हजार है।

अब तक 18 मुख्य गिरफ्तारियां

पुलिस के अनुसार, मामले में अब तक 18 मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। सभी पर संगठित अपराध, मादक पदार्थ अधिनियम, धोखाधड़ी, जालसाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध तस्करी से जुड़े गंभीर आरोप हैं। वाराणसी पुलिस ने इन सभी के खिलाफ पहले ही लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया था ताकि वे देश छोड़कर भाग न सकें। डीसीपी ने बताया कि मनी ट्रेल की जांच के लिए आर्थिक अपराध शाखा और साइबर सेल की मदद ली जाएगी। आरोपियों के बैंक खातों को फ्रीज किया गया है।