PM श्री योजना में मची खलबली! डीईओ ने आरोपों को सिरे से नकारा, बताया आखिर क्या है ‘पारदर्शी चयन’ का पूरा सच

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चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में पीएम  विद्यालयों में सामग्री आपूर्ति और भुगतान को लेकर उठ रहे सवालों पर जिला शिक्षा पदाधिकारी सह जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पूरे मामले को तथ्यों से हटकर और संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है.

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने बताया कि पीएम  योजना के तहत किसी भी स्तर पर केंद्रीकृत खरीद या जिला स्तर की निविदा प्रक्रिया नहीं अपनाई गई थी. सभी खरीद प्रक्रियाएं विद्यालय स्तर पर पूरी तरह पारदर्शी ढंग से की गईं. प्रत्येक विद्यालय ने कोटेशन के आधार पर एल-1 प्रक्रिया अपनाते हुए अपने स्तर से वेंडर का चयन किया.

उन्होंने कहा कि कुल 20 पीएम  विद्यालयों में 47 अलग-अलग वेंडर्स के माध्यम से सामग्री की आपूर्ति की गई. विभिन्न विद्यालयों ने अलग-अलग सप्लायर से सामग्री खरीदी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि किसी एक व्यक्ति या कंपनी को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया. सभी वेंडर्स द्वारा सौ प्रतिशत सामग्री की आपूर्ति की गई और किसी भी विद्यालय से दबाव, धमकी या अनियमितता की कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई.

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने आगे बताया कि सामग्री प्राप्त होने के बाद संबंधित विद्यालयों द्वारा विधिवत उपयोगिता प्रमाणपत्र (यूसी) जमा किया गया. सभी बिल और दस्तावेजों की पहले लेखा पदाधिकारी और प्रभाग प्रभारी द्वारा जांच की गई. इन्हीं सत्यापित दस्तावेजों के आधार पर भुगतान की स्वीकृति दी गई. भुगतान प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर मनमानी नहीं हुई और सभी कार्य नियमों के अनुरूप किए गए.

मीडिया रिपोर्ट्स पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ माध्यमों द्वारा अधूरी जानकारी के आधार पर भ्रामक निष्कर्ष प्रस्तुत किए जा रहे हैं. सीमित संख्या में वेंडर्स को केंद्र में रखकर पूरे मामले को गलत संदर्भ में दिखाया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भ्रम की स्थिति बन रही है.

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ रिपोर्ट्स में प्रति विद्यालय 25 लाख रुपये आवंटन की बात कही जा रही है, जो तथ्यात्मक रूप से गलत है. कुल 20 पीएम श्री विद्यालयों के लिए लगभग 2 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था, न कि प्रत्येक विद्यालय के लिए अलग-अलग 25 लाख रुपये.

अंत में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने मीडिया से अपील की कि समाचार प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की गंभीरता से जांच की जाए. उन्होंने कहा कि पीएम श्री योजना के तहत सामग्री आपूर्ति का संबंधित फेज पहले ही पूर्ण हो चुका है और वर्तमान में नए वित्तीय वर्ष के लिए राज्य स्तर से आपूर्ति की जा रही है, जिसमें जिले की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं है.