लखनऊ: लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से बड़ी संख्या में प्राइवेट गाड़ियों से डग्गामारी की जा रही है। लखनऊ आरटीओ ने ऐसी 653 गाड़ियों को चिह्नित किया है, जो एक महीने में एयरपोर्ट पर पांच-पांच बार आई हैं। 13 अक्टूबर से 13 नवंबर तक 10,162 ऐसी गाड़ियां भी चिह्नित हुई हैं, जो दो-दो बार एयरपोर्ट पहुंची हैं। हालांकि, अभी आरटीओ इन गाड़ियों में प्राइवेट वाहनों को चिह्नित कर रहा है। प्राइवेट नंबर वाले वाहन अगर बार-बार एयरपोर्ट आ जा रहे हैं तो उन पर डग्गामारी का संदेह है।
एयरपोर्ट का पांच से ज्यादा बार चक्कर लगाने वाले सभी वाहनों को लखनऊ आरटीओ नोटिस भेज रहा है। अगर ये वाहन डग्गामारी में शामिल पाए जाते है तो इन्हें कमर्शल वाहन के रूप में कन्वर्ट करवाया जाएगा।
आरटीओ ने अमौसी एयरपोर्ट पर कैमरों और टोल की मदद से इन गाड़ियों का ब्योरा निकलवाया है। पांच-पांच से ज्यादा बार एयरपोर्ट आने वाले वाहनों को नोटिस भेजे जा रहे हैं। उनसे पूछा जाएगा कि आखिर ऐसा क्या काम है कि उनको बार-बार एयरपोर्ट आना पड़ रहा है। सीसीटीवी फुटेज से यह भी निकाला गया है कि हर बार आने-जाने पर वाहन में बैठे लोग अलग-अलग हैं। ऐसे में संदेह है कि ये गाड़ियां यात्री वाहन के रूप में चल रही हैं।
आरटीओ प्रवर्तन ने किया 133 का चालान
एयरपोर्ट पर 17 से 20 नवंबर तक आरटीओ प्रवर्तन की टीम ने अभियान चलाते हुए 707 वाहनों की जांच की है। इसमें 133 प्राइवेट वाहन कमर्शल गतिविधि में शामिल मिले। सभी वाहनो का का चालान करते हुए 69 वाहनों को सीज किया गया है। इन वाहनों को टैक्सी के रूप में परिवर्तित करने की प्रक्रिया चल रही है। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात कुमार पांडेय ने बताया कि अभी तक छह वाहनों को टैक्सी में परिवर्तित कर दिया गया है। यह अभियान पीटीओ आभा त्रिपाठी, अनीता वर्मा, एसपी देव, हरदोई के पीटीओ खेमानन्द पांडेय, सीतापुर के आब्दीन अहमद और लखीमपुर-खीरी के कौशलेन्द्र प्रताप सिंह ने चलाया है।
क्यों चल रहा है यह खेल?
यह पूरा खेल रोड टैक्स और कमर्शल टैक्स से बचने के लिए किया जा रहा है। दरअसल, कमर्शल वाहनों का रोड टैक्स प्राइवेट गाड़ियों से ज्यादा होता है और हर दो साल पर वाहन की फिटनेस भी करवानी पड़ती है। इसके अलावा इन वाहनों का कमर्शल टैक्स भी देना पड़ता है। इन सबसे बचने के लिए कई लोग गाड़ी का कमर्शल रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते और गाड़ियों को सवारी ढोने में इस्तेमाल करते हैं। इससे सरकार के राजस्व के साथ यात्रियों को भी नुकसान होता है। इन वाहनों के पास कमर्शल गाड़ी की किराया सूची नहीं होती है। इस कारण प्राइवेट गाड़ियां यात्रियो को उनके गंतव्य तक पहुंचाने के एवज में मनमाना किराया भी वसूलती हैं। टैक्स से बचने के लिए यात्रियों को किराए का बिल भी मुहैया नहीं करवाया जाता।
क्या होगी कार्रवाई
कमर्शल वाहन नहीं होने की वजह से इन गाड़ियों मे सवारी ढोने के दौरान कई खतरे भी होते है। इन गाड़ियों में स्पीड लिमिट डिवाइस नहीं होती। सुरक्षा के लिए कलर डिकोडिंग नहीं होती है। आरटीओ इन प्राइवेट नंबर के वाहनों को कमर्शल में कन्वर्ट करवाएगा। वाहन स्वामियों से पुराना टैक्स भी कमर्शल गाड़ी का वसूला जाएगा। इस आदेश का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश परिवहन आयुक्त की ओर से दिए गए हैं।









