Tariff: भारत-अमेरिका व्यापार तनाव: टैरिफ़ से बढ़ा विवाद, BRICS को मिला मज़बूती का मौका….

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Tariff: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता पर अनिश्चितता बनी हुई है। एक ओर दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर सक्रिय संपर्क में हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के हालिया 50% टैरिफ़ ने रिश्तों में खटास डाल दी है। इस कदम की न केवल भारत ने आलोचना की है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे आत्मघाती बताया जा रहा है।

25% अतिरिक्त टैरिफ हटाना अनिवार्य शर्त नहीं: भारत सरकार

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25% शुल्क को हटाना अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता दोबारा शुरू करने की पूर्व-शर्त नहीं है। हालांकि, यदि ये टैरिफ बने रहते हैं तो किसी भी व्यापार समझौते को “व्यावहारिक” मानना मुश्किल होगा।

सूत्रों ने बताया कि अगस्त के अंत में होने वाला औपचारिक वार्ता दौर स्थगित कर दिया गया है। “अभी तारीख तय नहीं की गई है क्योंकि अतिरिक्त टैरिफ की स्थिति में पूरे BTA पैकेज पर चर्चा करना व्यावहारिक नहीं था,” एक अधिकारी ने कहा।

सरकार निर्यातकों की तरलता (liquidity) से जुड़ी समस्याओं को हल करने के उपाय कर रही है और आने वाले समय में Export Promotion Mission शुरू करने की योजना बना रही है।

अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ़ का चेतावनी भरा बयान

अमेरिकी मार्क्सवादी अर्थशास्त्री रिचर्ड वोल्फ़ ने चेतावनी दी है कि अमेरिका भारत पर दबाव डालकर खुद को ही नुकसान पहुँचा रहा है। उन्होंने कहा,
“भारत अब संयुक्त राष्ट्र के अनुसार दुनिया का सबसे बड़ा देश है। अमेरिका का भारत को आदेश देना वैसा ही है जैसे कोई चूहा हाथी पर मुक्का मार रहा हो।”

वोल्फ़ के मुताबिक, अगर अमेरिका भारत का बाज़ार बंद भी कर दे तो भारत अपने निर्यात के लिए अन्य रास्ते खोज लेगा, और यह कदम BRICS को और मज़बूत करेगा।

BRICS बनाम G7: बदलता आर्थिक संतुलन

वर्तमान में BRICS में दस देश शामिल हैं—ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात। यह समूह पश्चिमी वित्तीय प्रभुत्व और डॉलर की पकड़ को चुनौती देने की दिशा में काम कर रहा है।

वोल्फ़ ने कहा,
“चीन, भारत, रूस और पूरे BRICS का वैश्विक उत्पादन में हिस्सा 35% है, जबकि G7 देशों का योगदान घटकर 28% रह गया है। अमेरिका की नीतियाँ अनजाने में BRICS को और अधिक एकीकृत तथा मज़बूत आर्थिक विकल्प बना रही हैं।”

भारत का कड़ा रुख

नई दिल्ली ने अमेरिकी कदम की आलोचना करते हुए इसे “अनुचित, अन्यायपूर्ण और गैर-तर्कसंगत” बताया है। अधिकारियों का कहना है कि 25% पारस्परिक और 25% दंडात्मक टैरिफ को साथ में हल करना ज़रूरी होगा।

एक अधिकारी ने स्पष्ट किया, “निर्यात प्रोत्साहन केवल कुछ प्रतिशत तक ही हो सकते हैं, लेकिन 50% शुल्क के साथ निर्यात असंभव हो जाता है। केवल प्रोत्साहनों से समस्या हल नहीं होगी।”

Tariff: निष्कर्ष: रिश्तों में तनाव, BRICS को बढ़त

जहाँ एक ओर भारत और अमेरिका आधिकारिक व्यापार वार्ता की नई तारीख तय करने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर टैरिफ़ विवाद ने रिश्तों को पेचीदा बना दिया है। अमेरिकी अर्थशास्त्रियों का भी मानना है कि इन कदमों से भारत झुकेगा नहीं, बल्कि BRICS और मज़बूत होकर पश्चिमी आर्थिक प्रभुत्व को चुनौती देगा।