पाकिस्तान को राहत पैकेज, IMF से 1.2 अरब डॉलर फंड पर बनी बात

0
4

इस्लामाबाद |आर्थिक बदहाली और महंगाई की मार झेल रहे पाकिस्तान के लिए राहत भरी खबर आई है। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और पाकिस्तान के बीच करीब 1.2 अरब डॉलर को लेकर कर्मचारी स्तर का समझौता (SLA) हो गया है। यह समझौता हफ्तों तक चली लंबी बातचीत के बाद हुआ है। इस पैसे से पाकिस्तान को अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए कुछ और समय मिल गया है।

दो रास्तों से आएगी मदद

आईएमएफ के मुताबिक, यह फंड दो अलग-अलग व्यवस्थाओं के तहत दिया जाएगा। पहला है 'विस्तारित कोष सुविधा' (EFF) और दूसरा 'लचीलापन और स्थिरता सुविधा'(RSF)। ईएफएफ उन देशों को दी जाती है जो गंभीर संकट से जूझ रहे होते हैं, यानी जो लंबे समय तक भुगतान करने में सक्षम नहीं होते। आईएमएफ मिशन की प्रमुख इवा पेत्रोवा ने कहा कि आईएमएफ बोर्ड की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद पाकिस्तान को EFF के तहत लगभग 1 अरब डॉलर और RSF के तहत 21 करोड़ डॉलर मिलेंगे।

बंद कमरों से वर्चुअल बातचीत तक का सफर

इस समझौते तक पहुंचना पाकिस्तान के लिए आसान नहीं था। आईएमएफ की टीम ने 25 फरवरी से 2 मार्च तक इस्लामाबाद और कराची में डेरा डाला था। पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ आमने-सामने की बातचीत में कई पेंच फंसे थे, जिसके कारण टीम बिना किसी समझौते के वापस लौट गई थी। इसके बाद कई दौर की वर्चुअल मीटिंग्स हुईं। दावा किया गया है कि इस दौरान पाकिस्तान सरकार ने भविष्य में कड़े आर्थिक फैसले लेने का भरोसा दिलाना दिलाया है। इसके बाद बातचीत बनी है। 

पाकिस्तान को आर्थिक नीति को सख्त बनाना होगा-आईएमएफ

आईएमएफ का कहना है कि पाकिस्तान को अपनी व्यापक आर्थिक नीतियों को और सख्त बनाना होगा। इसका सीधा मतलब है कि आने वाले दिनों में पाकिस्तान की जनता पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है। इतना ही नहीं,  बिजली-गैस की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। पाकिस्तान सरकार को ऊर्जा क्षेत्र में घाटे को कम करने और सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने के लिए कहा गया है, जिससे गरीब तबके को बढ़ती कीमतों से बचाया जा सके।गौरतलब है कि पाकिस्तान ने साल 2024 में 7 अरब डॉलर के EFF कार्यक्रम में प्रवेश किया था। इसका उद्देश्य अर्थव्यवस्था में सुधार करना है। इसके साथ ही, पिछले साल उसे जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से निपटने के लिए 1.4 अरब डॉलर का RSF फंड भी मिला था। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह 1.2 अरब डॉलर पाकिस्तान को दिवालिया होने से तो बचा लेंगे, लेकिन स्थायी सुधार के लिए पाकिस्तान को अपनी नीतियों में बुनियादी बदलाव करने होंगे।