भारत दौरे पर रूस के डिप्टी पीएम मंटुरोव, व्यापार, ऊर्जा और पश्चिम एशिया पर चर्चा

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नई दिल्ली। रूस के पहले उपप्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंचे हैं। उनका यह दौरा दो और तीन अप्रैल 2026 तक है। इस दौरान उन्होंने भारत के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की और पश्चिम एशिया समेत कई मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्रालय ने जानकारी दी कि मंटुरोव ने 3 अप्रैल को नई दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर के साथ बैठक की। मंटुरोव व्यापार, अर्थव्यवस्था, विज्ञान, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग पर बने भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग के सह-अध्यक्ष भी हैं। दोनों पक्षों ने व्यापार, उद्योग, ऊर्जा और उर्वरक के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बात की। इसके अलावा कनेक्टिविटी, तकनीक, नवाचार और जरूरी खनिजों में नए मौकों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों नेताओं ने पिछले साल दिसंबर में हुए 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के फैसलों को लागू करने की प्रगति की समीक्षा की। इसके अलावा मंटुरोव ने पश्चिम एशिया के संघर्ष और दुनिया के अन्य बड़े घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए। अपने दौरे के दौरान मंटुरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। इसके अलावा उन्होंने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ भी मुलाकात की।

डिप्टी पीएम के साथ मुलाकात के बाद विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट में कहा, ‘गुरुवार को नई दिल्ली में रूस के प्रथम उप प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव की मेजबानी करके मुझे प्रसन्नता हुई। हमने अपने द्विपक्षीय सहयोग पर गहन चर्चा की, जिसमें व्यापार, उद्योग, ऊर्जा, उर्वरक, कनेक्टिविटी और मोबिलिटी पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही, प्रौद्योगिकी, नवाचार और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में मौजूद नए अवसरों पर भी बात हुई। हमने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया, जिसमें पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष भी शामिल है।’

इससे पहले रूसी संघ के पहले उप-प्रधानमंत्री डेनिस मंटुरोव ने गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत-रूस संबंधों की प्रगति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात के दौरान उन्होंने आपसी सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति के बारे में जानकारी दी, जिसमें व्यापार और आर्थिक साझेदारी, उर्वरक, कनेक्टिविटी और लोगों के बीच संबंध शामिल हैं।