ब्लैक स्पॉट पर हुआ हादसा, ड्राइवर की केबिन में फंसी हालत में मौत

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जोधपुर। शहर के रिंग रोड पर चौखा-केरू क्षेत्र में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर देखने को मिला, जहां रॉयल्टी नाके के पास बने यू-टर्न पर एक भीषण सड़क दुर्घटना घटित हुई। मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे एक खाली डंपर अनियंत्रित होकर सामने से यू-टर्न ले रहे पत्थरों से लदे ट्रक के पिछले हिस्से में जा घुसा। इस जबरदस्त भिड़ंत में डंपर का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और उसके चालक की जान चली गई। सीसीटीवी में कैद हुई इस घटना ने हाईवे पर सुरक्षा इंतजामों और खतरनाक मोड़ों को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।


मलबे में तब्दील केबिन और चालक की दर्दनाक मृत्यु

हादसा इतना भयावह था कि डंपर का केबिन पिचक कर ट्रक के पिछले हिस्से में फंस गया, जिसके चलते 61 वर्षीय चालक मांगीलाल उसमें बुरी तरह दब गए। सूचना मिलते ही राजीव गांधी नगर थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थानीय नागरिकों और क्रेन की सहायता से काफी मशक्कत के बाद चालक को बाहर निकाला। हालांकि, अस्पताल ले जाते समय रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मृतक के परिजनों की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जानलेवा बना ब्लैक स्पॉट और प्रशासन की लापरवाही

चौखा क्षेत्र का यह घुमावदार मोड़ और रॉयल्टी नाके के पास बना कट अब एक खतरनाक 'ब्लैक स्पॉट' के रूप में उभर चुका है, जहाँ पहले भी कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि भारी वाहन अक्सर गलत तरीके से यू-टर्न लेते हैं और तेज रफ्तार के कारण पीछे से आने वाले वाहन संभल नहीं पाते। जुलाई 2023 में भी इसी स्थान पर दो अलग-अलग हादसों में चार मौतें हुई थीं, लेकिन इसके बावजूद न तो रॉयल्टी नाके की स्थिति बदली गई और न ही इस कट को बंद या सुरक्षित करने के कोई पुख्ता इंतजाम किए गए।

न्यायिक संज्ञान के बाद भी सुरक्षा इंतजाम अधूरी

इस विशेष स्थान पर होने वाली दुर्घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट पहले ही स्वत: संज्ञान ले चुका है और संबंधित विभागों को सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे। ताजा हादसे के बाद पुलिस प्रशासन ने एक बार फिर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर इस जानलेवा मोड़ और धर्मकांटे की स्थिति से अवगत कराया है। बार-बार होने वाली इन घटनाओं ने स्पष्ट कर दिया है कि कागजी निर्देशों के बजाय अब धरातल पर कड़े इंजीनियरिंग बदलावों की सख्त जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।