गिरफ्तारी पर रोक के बाद Anant Singh केस में बढ़ी चर्चा

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गोपालगंज। मोकामा के विधायक अनंत सिंह को गोपालगंज व्यवहार न्यायालय (सिविल कोर्ट) से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन से जुड़े एक वायरल वीडियो के मामले में विधायक की गिरफ्तारी पर फिलहाल अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद विधायक और उनके समर्थक खेमे ने बड़ी राहत की सांस ली है। अब इस चर्चित मामले की अगली सुनवाई आगामी 29 मई को मुकर्रर की गई है।

सोशल मीडिया पर हथियारों के प्रदर्शन वाले वीडियो से शुरू हुआ था बवाल

यह पूरा विवाद इसी महीने 2 मई को सामने आए एक वीडियो से जुड़ा है। गोपालगंज जिले के मीरगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत सेमराव गांव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो में सरेआम अत्याधुनिक हथियारों की नुमाइश करने और अश्लील गानों पर अभद्र व्यवहार किए जाने के गंभीर आरोप लगे थे। वीडियो के तूल पकड़ते ही पुलिस महकमा हरकत में आया और मीरगंज थाना पुलिस ने मामले का स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए केस दर्ज किया, जिसमें मोकामा विधायक अनंत सिंह को भी नामजद आरोपी बनाया गया था।

गिरफ्तारी की तलवार लटकी तो वकीलों ने कोर्ट में लगाई गुहार

पुलिस एफआईआर (FIR) में नाम आने के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि पुलिस किसी भी वक्त विधायक को गिरफ्तार कर सकती है। गिरफ्तारी की इसी आशंका के बीच अनंत सिंह के अधिवक्ताओं ने अदालत की शरण ली और अग्रिम राहत के लिए अर्जी दाखिल की। मामले की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायाधीश ने पुलिस प्रशासन को निर्देशित किया कि आगामी सुनवाई तक विधायक के खिलाफ कोई भी दंडात्मक या बलपूर्वक कार्रवाई न की जाए।

29 मई की तारीख बेहद अहम, केस डायरी पर टिकीं नजरें

अदालत से मिली यह राहत अस्थाई है और अब सबकी नजरें 29 मई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिक गई हैं। कानूनी जानकारों का मानना है कि अगली तारीख पर पुलिस प्रशासन मामले की केस डायरी (अनुसंधान डायरी) और वायरल वीडियो की फॉरेंसिक व तकनीकी जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश कर सकता है। इन सबूतों की समीक्षा के बाद ही कोर्ट यह तय करेगा कि विधायक की अंतरिम राहत आगे बढ़ेगी या पुलिस को एक्शन की छूट मिलेगी।

बिहार के सियासी गलियारों में हलचल तेज

अदालत के इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में भी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। अनंत सिंह बिहार के रसूखदार नेताओं में गिने जाते हैं, इसलिए इस कानूनी लड़ाई पर न सिर्फ उनके समर्थकों बल्कि विपक्षी दलों की भी पैनी नजर बनी हुई है। फिलहाल 29 मई तक के लिए इस मामले में कानूनी टकराव टल गया है।