रायपुर। छत्तीसगढ़ में आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़े लगातार एक गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक चिंता का विषय बने हुए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ओर से जारी किए गए नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, सुसाइड रेट (आत्महत्या दर) के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में चौथे पायदान पर पहुंच गया है। हालांकि, राहत की बात यह है कि बीते वर्ष की तुलना में कुल मामलों में थोड़ी कमी देखी गई है, लेकिन मौजूदा स्थिति अब भी समाज के भीतर पनप रहे मानसिक और आर्थिक दबाव की भयावह तस्वीर पेश कर रही है। सामाजिक विश्लेषकों का मानना है कि इन आंकड़ों को महज संख्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसके पीछे के मनोवैज्ञानिक संकट को समझने की जरूरत है।
क्या बयां करती है एनसीआरबी 2023 की ताजा रिपोर्ट?
राष्ट्रीय औसत से दोगुने मामले: आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 के दौरान छत्तीसगढ़ में कुल 7,868 लोगों ने आत्मघाती कदम उठाया। राज्य में यह दर प्रति एक लाख की आबादी पर 26 दर्ज की गई है, जो कि देश के राष्ट्रीय औसत (12.3) के मुकाबले करीब दोगुनी है। इसी वजह से देश के सर्वाधिक सुसाइड रेट वाले राज्यों में छत्तीसगढ़ चौथे स्थान पर है।
शीर्ष राज्यों की स्थिति: इस सूची में छत्तीसगढ़ से ऊपर केवल सिक्किम, केरल और तेलंगाना जैसे राज्य हैं। हालांकि, साल 2022 के मुकाबले 2023 में इन मामलों में लगभग 6.8 प्रतिशत की आंशिक गिरावट आई है, जिसे जानकार बहुत बड़ा सुधार नहीं मान रहे हैं।
साल 2022 में हालात और भी ज्यादा विकट थे
यदि बीते कुछ वर्षों का विश्लेषण करें, तो वर्ष 2022 में छत्तीसगढ़ के भीतर 8,446 सुसाइड केस सामने आए थे। उस दौरान राज्य इस सूची में तीसरे पायदान पर था और तब सुसाइड रेट 28.2 प्रति लाख दर्ज की गई थी, जो राष्ट्रीय औसत 12.4 से काफी ऊपर थी। आंकड़ों का यह तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि भले ही एक साल में मामूली सुधार दिखा हो, लेकिन दीर्घकालिक रूप से समस्या जस की तस बनी हुई है।
देशव्यापी स्तर पर भी गहरा रहा है यह संकट
यह चुनौती केवल किसी एक प्रदेश तक सीमित नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय समस्या बन चुकी है। साल 2023 में पूरे भारत में 1.71 लाख से अधिक लोगों ने अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। एनसीआरबी के विश्लेषण के मुताबिक, घरेलू कलह, गंभीर बीमारियां, वित्तीय संकट और अत्यधिक मानसिक तनाव इसके मुख्य कारण बनकर उभरे हैं। कुल मामलों की संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्य सबसे आगे रहे हैं।
किस वर्ग पर मंडरा रहा है सबसे ज्यादा खतरा?
मनोवैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों के अनुसार, इस संकट की सबसे बड़ी मार दैनिक वेतनभोगी मजदूरों पर पड़ रही है। इसके साथ ही:
आर्थिक तंगी से जूझ रहे किसान
रोजगार की तलाश में भटक रहे बेरोजगार युवा
परीक्षाओं और करियर के दबाव में दबे छात्र
ग्रामीण अंचलों में कृषि संबंधी अनिश्चितता और कर्ज का बोझ लोगों को मानसिक रूप से तोड़ रहा है, जबकि शहरी इलाकों में गलाकाट प्रतिस्पर्धा, करियर को लेकर चिंताएं और पारिवारिक उम्मीदें तनाव को बढ़ा रही हैं।
मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल एक व्यक्तिगत फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ी स्वास्थ्य संबंधी चुनौती है। छत्तीसगढ़ के दूरदराज के क्षेत्रों में काउंसिलिंग सेंटर्स, प्रशिक्षित मनोचिकित्सकों और जागरूकता अभियानों की भारी कमी है, जिसके चलते डिप्रेशन या अवसाद से घिरे लोग सही समय पर चिकित्सकीय परामर्श या मदद नहीं पा पाते।
हालिया घटनाओं ने झकझोरा
हाल के दिनों में घटित कुछ घटनाओं ने इस समस्या की गंभीरता को साफ कर दिया है। पढ़ाई और परीक्षा में मनमुताबिक परिणाम न मिलने के कारण एक बीटेक के छात्र ने फांसी लगा ली, वहीं लंबे समय से अवसाद से जूझ रहे एक मेडिकल छात्र ने भी आत्मघाती कदम उठा लिया। इनके अलावा, सामाजिक लोकलाज और घरेलू विवादों के चलते कई लोगों ने भावनात्मक रूप से बिखरकर अपनी जान दे दी।
मुख्य सामाजिक और आर्थिक कारक
जानकारों ने छत्तीसगढ़ में इस समस्या के पीछे मुख्य रूप से पांच कारणों को जिम्मेदार माना है:
वित्तीय अस्थिरता और कर्ज का जाल
बेरोजगारी और आय के साधनों का अभाव
पारिवारिक मतभेद और आपसी कलह
मादक पदार्थों और नशे की लत
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परामर्श सेवाओं की कमी
विशेषज्ञों का सुझाव और समाधान
चिकित्सकों का स्पष्ट कहना है कि यदि संकट के समय पीड़ित व्यक्ति को सही काउंसिलिंग और अपनों का साथ मिल जाए, तो अधिकांश मामलों को समय रहते टाला जा सकता है। इसके लिए स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करने और जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
महत्वपूर्ण सूचना (मदद कहाँ मिलेगी?): यदि आप या आपका कोई परिचित किसी भी तरह के मानसिक तनाव, निराशा या अवसाद से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। भारत सरकार की आधिकारिक टेली-मानस (Tele-MANAS) हेल्पलाइन नंबर 14416 या 1-800-891-4416 पर कॉल करके आप चौबीसों घंटे मुफ्त और गोपनीय मानसिक परामर्श प्राप्त कर सकते हैं।









