नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। खड़गे ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार (इंटरनेशनल मार्केट) में कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) के दाम कम होने के बावजूद सरकार आम जनता को कोई राहत नहीं दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता को सस्ती दर पर ईंधन देने के बजाय केवल अपना खजाना भरने में व्यस्त है।
2014 और आज के दामों की तुलना
मल्लिकार्जुन खड़गे ने मंगलवार को सरकारी आंकड़ों को सामने रखते हुए कहा कि 26 मई 2014 को जब नरेंद्र मोदी ने पहली बार देश के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, उस समय भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत 108.05 डॉलर प्रति बैरल थी और डॉलर के मुकाबले रुपया 58.59 रुपये पर था। उस दौरान देश की जनता को पेट्रोल 71.51 रुपये और डीजल 56.71 रुपये प्रति लीटर मिल रहा था।
कच्चा तेल सस्ता, फिर भी देश में ईंधन महंगा
कांग्रेस अध्यक्ष ने आंकड़ों के जरिए आज की स्थिति बताते हुए कहा कि वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत घटकर 99 डॉलर प्रति बैरल से भी कम हो चुकी है। इसके बावजूद भारत में पेट्रोल के दाम बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम 95.20 रुपये प्रति लीटर तक पहुँच गए हैं। उन्होंने हिसाब बताते हुए कहा कि 2014 के मुकाबले आज देश में पेट्रोल लगभग 42.8% और डीजल करीब 67.9% तक महंगा हो चुका है, जो कि सरासर गलत है।
महंगाई से बेहाल आम जनता
खड़गे ने ईंधन के बढ़ते दामों के बड़े असर को समझाते हुए कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल गाड़ियों तक सीमित नहीं रहतीं। जब ईंधन महंगा होता है, तो मालगाड़ियों और ट्रकों का किराया (परिवहन खर्च) बढ़ जाता है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों और रोजमर्रा की अन्य जरूरी वस्तुओं पर पड़ता है, जिससे हर चीज महंगी हो जाती है और आम आदमी पर महंगाई का भारी बोझ बढ़ता है।
सरकार से सीधे सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने केंद्र सरकार से सीधे शब्दों में सवाल पूछा है कि जब दुनिया भर के बाजारों में कच्चा तेल सस्ता मिल रहा है, तो देश के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम क्यों नहीं की जा रही हैं? उन्होंने मांग की है कि सरकार को अपने फायदे की राजनीति छोड़कर तुरंत ईंधन के दाम घटाने चाहिए ताकि देश की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता को इस कमरतोड़ महंगाई से राहत मिल सके।









