नई दिल्ली| संसद परिसर में मकर द्वार के बाहर एक दिलचस्प राजनीतिक नजारा देखने को मिला, जहां टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी 'गद्दार' लिखे पोस्टर लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। उसी दौरान वहां कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा पहुंच गईं। उनके साथ निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी मौजूद थे। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच पुरानी राजनीतिक यादों और शिकायतों को लेकर एक हल्की-फुल्की लेकिन तीखी बहस छिड़ गई।
क्या था पूरा मामला और प्रियंका का तंज?
संसद से निलंबित होने के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी मकर द्वार के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। जब प्रियंका गांधी वहां से गुजर रही थीं, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'आप लोगों ने कांग्रेस के नेताओं को तोड़ा और अपनी पार्टी में मिला लिया।' प्रियंका का यह इशारा उन नेताओं की तरफ था जो समय-समय पर कांग्रेस छोड़कर तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए हैं।
1997 के इतिहास पर हुआ पलटवार
प्रियंका के इस तंज पर कल्याण बनर्जी ने तुरंत पलटवार किया और कांग्रेस के पुराने इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी को 1997 में कांग्रेस से बाहर का रास्ता दिखाया गया था, वह खुद अपनी मर्जी से अलग नहीं हुई थीं, बल्कि उन्हें निकाला गया था जिसके बाद उन्होंने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की। कल्याण बनर्जी ने यह भी कहा कि वह खुद कभी युवा कांग्रेस में थे और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को किनारे किए जाने की वजह से ही आज यह स्थिति बनी है। इस बीच जब पप्पू यादव ने कुछ कहना चाहा, तो कल्याण बनर्जी ने उन्हें रोकते हुए टोक दिया।
राजीव गांधी के जिक्र पर बनी सहमति
बातचीत के दौरान प्रियंका गांधी ने अपने पिता और देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा ममता बनर्जी को आगे बढ़ने का पूरा मौका और समर्थन दिया था। इस बात पर कल्याण बनर्जी ने भी हामी भरी और स्वीकार किया कि शुरुआती दौर में ममता बनर्जी को राजीव गांधी का भरपूर सहयोग मिला था। वर्ष 1984 में जब ममता बनर्जी ने दिग्गज कम्युनिस्ट नेता सोमनाथ चटर्जी को हराया था, तब राजीव गांधी ने ही उन्हें राजनीति में आगे बढ़ाया था।
टीएमसी के भीतर अंदरूनी खींचतान
हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस के भीतर कुछ सांसदों की बगावत और पार्टी छोड़कर अन्य दलों में जाने की खबरों ने सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। पार्टी से असंतुष्ट कुछ नेताओं की गतिविधियों को टीएमसी ने 'विश्वासघात' करार दिया है। संसद परिसर में 'गद्दार' लिखे पोस्टरों के साथ किया गया यह प्रदर्शन इसी अंदरूनी नाराजगी और कलह का नतीजा है, जिसके जरिए पार्टी अपने बागी नेताओं पर निशाना साध रही है।









