गर्मियों में अमृत माना जाने वाला बेल का शरबत इन मरीजों के लिए है ‘जहर’, फायदे की जगह पहुंचा सकता है बड़ा नुकसान

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तपती गर्मी के मौसम में बदन को शीतलता प्रदान करने और खुद को तरोताजा रखने के लिए बेल का शरबत लोगों की पहली पसंद होता है। राह चलते ठेलों से लेकर बड़ी जूस की दुकानों पर मात्र 20-30 रुपये में मिलने वाला यह पारंपरिक पेय सेहत का खजाना माना जाता है। पोषक तत्वों की बात करें तो इसमें प्रचुर मात्रा में फाइबर, विटामिन सी, कैल्शियम और अन्य आवश्यक तत्व पाए जाते हैं, जो हमारे पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने और शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करते हैं।

हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर गुणकारी चीज सभी के स्वास्थ्य के लिए अनुकूल हो। कुछ विशेष शारीरिक परिस्थितियों में बेल का शरबत सेहत को लाभ पहुंचाने के बजाय भारी नुकसान भी पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं इसके अद्भुत फायदों के साथ-साथ उन लोगों के बारे में जिन्हें इसके सेवन से दूरी बना लेनी चाहिए।

गर्मी का अचूक इलाज है बेल का शरबत, जानिए इसके बेमिसाल फायदे

आयुर्वेद के अनुसार बेल की तासीर काफी ठंडी होती है, जो चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों से शरीर की रक्षा करती है। गर्मियों के दिनों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) का खतरा सबसे ज्यादा रहता है, ऐसे में यह शरबत शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने में बेहद मददगार है। इसके अलावा, बेल में मौजूद डाइटरी फाइबर पेट की अंदरूनी सफाई करते हैं, जिससे पाचन क्रिया सुचारू रूप से काम करती है। यही नहीं, इसमें पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स और विटामिंस हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) को भी बूस्ट करते हैं, जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा कम हो जाता है।

इन तीन तरह के मरीजों के लिए जहर समान हो सकता है बेल का सेवन

भले ही बेल औषधीय गुणों से भरपूर है, लेकिन निम्नलिखित तीन समस्याओं से जूझ रहे लोगों को इसके सेवन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए:

  • कब्ज के पुराने रोगी: आमतौर पर बेल पेट के लिए अच्छा है, लेकिन यदि कोई व्यक्ति पहले से ही गंभीर या पुरानी कब्ज (क्रोनिक कॉन्स्टिपेशन) से पीड़ित है, तो इसका जरूरत से ज्यादा सेवन आंतों की कार्यप्रणाली को धीमा कर सकता है। इसमें मौजूद टैनिन नामक तत्व मल को और अधिक कड़ा बना सकता है, जिससे पेट में भारीपन, गैस और दर्द की समस्या बढ़ जाती है।

  • मधुमेह (डायबिटीज) के मरीज: शुगर के रोगियों को बेल का शरबत पीते समय बेहद सतर्क रहना चाहिए। भले ही फल का अपना प्राकृतिक मीठापन होता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले शरबत में स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से ढेर सारी चीनी मिलाई जाती है। यह अतिरिक्त चीनी ब्लड शुगर लेवल को अचानक से स्पाइक (तेजी से बढ़ा) कर सकती है, जिससे मधुमेह को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

  • लो ब्लड शुगर (हाइपोग्लाइसीमिया) की समस्या: जिन लोगों का रक्त शर्करा का स्तर अक्सर सामान्य से कम रहता है, उन्हें भी इसके सेवन से बचना चाहिए। बेल के कुछ तत्व शरीर के मेटाबॉलिज्म को इस तरह प्रभावित कर सकते हैं जिससे शुगर का स्तर और गिर जाता है, परिणामतः चक्कर आना, अत्यधिक थकान और कमजोरी जैसी दिक्कतें शुरू हो सकती हैं।

शरबत पीते समय बरतें ये सावधानियां, नहीं तो बिगड़ सकती है तबीयत

बेल के शरबत का पूरा फायदा उठाने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। हमेशा ध्यान रखें कि शरबत पूरी तरह से साफ-सफाई के साथ ताजा तैयार किया गया हो, क्योंकि गर्मियों में बैक्टीरिया बहुत जल्दी पनपते हैं। स्वाद के चक्कर में इसका अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से बचें, दिन में एक गिलास शरबत पर्याप्त होता है। यदि आप घर पर इसे बना रहे हैं, तो चीनी की जगह मिश्री या गुड़ का इस्तेमाल करें और बाजार से खरीदते वक्त बिना अतिरिक्त चीनी वाला जूस ही प्राथमिकता पर रखें। यदि आप पहले से किसी गंभीर बीमारी की दवा ले रहे हैं, तो अपने चिकित्सक की सलाह के बाद ही इसे अपनी डाइट में शामिल करें।