नई मांओं की डाइट में जरूर शामिल करें ये सुपरफूड्स, ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने में मिल सकती है मदद

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नई दिल्ली| प्रत्येक वर्ष 1 से 7 अगस्त तक 'वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक' (विश्व स्तनपान सप्ताह) मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य स्तनपान के अत्यधिक महत्व के प्रति समाज में जागरूकता फैलाना तथा मां और नवजात शिशु के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। किसी भी नए जन्मे शिशु के लिए माँ का दूध संपूर्ण और आदर्श आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें बच्चे के शारीरिक विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व, एंटीबॉडी और उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने वाले जरूरी तत्व प्राकृतिक रूप से मौजूद होते हैं। हालांकि, प्रसव के बाद कई नई माताओं को यह चिंता सताती रहती है कि उनके शरीर में पर्याप्त मात्रा में ब्रेस्ट मिल्क का उत्पादन नहीं हो पा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, स्तनपान कराने वाली महिलाओं में मिल्क प्रोडक्शन मुख्य रूप से कई शारीरिक व मानसिक कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें लगातार स्तनपान कराना, पर्याप्त नींद लेना, तनावमुक्त रहना और एक संतुलित व पौष्टिक आहार का सेवन करना सबसे प्रमुख हैं। अपनी दैनिक डाइट में कुछ विशेष और पारंपरिक पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने से शरीर को भरपूर ऊर्जा मिलती है और दुग्ध उत्पादन की प्रक्रिया को प्राकृतिक रूप से बढ़ावा मिल सकता है। आइए जानते हैं कि ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को अपनी डाइट में किन चीजों को अवश्य शामिल करना चाहिए।

स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए जरूरी और पौष्टिक फूड्स

  • ओट्स (Oats): ओट्स में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर, आयरन और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट पाए जाते हैं। यह न केवल शरीर में लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है, बल्कि कई महिलाओं में मिल्क सप्लाई को सपोर्ट करने के लिए भी बेहतरीन आहार माना जाता है।

  • मेथी के दाने (Fenugreek Seeds): पारंपरिक समय से ही मेथी को ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने वाले सबसे प्रभावी खाद्य पदार्थों में गिना जाता है। हालांकि, इसका असर हर महिला के शरीर पर अलग तरीके से हो सकता है, इसलिए इसके सेवन से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर रहता है।

  • सौंफ (Fennel Seeds): सौंफ पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने के साथ-साथ स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए बेहद गुणकारी मानी जाती है। इसे हल्का भूनकर, चाय में मिलाकर या पानी में उबालकर पिया जा सकता है।

  • हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी, सरसों और चौलाई जैसी हरी सब्जियों में आयरन, कैल्शियम, विटामिन्स और फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो प्रसव के बाद मां के शरीर को मजबूत और पोषित करते हैं।

  • दूध और डेयरी प्रोडक्ट्स: दूध, दही और पनीर कैल्शियम और हाई-क्वालिटी प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं। ये स्तनपान कराने वाली मां की हड्डियों की मजबूती और शारीरिक रिकवरी में सहायता करते हैं।

  • ड्राई फ्रूट्स और नट्स: बादाम, अखरोट, पिस्ता और काजू में हेल्दी फैट्स, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड पाए जाते हैं, जो शरीर को अंदरूनी ताकत देते हैं।

  • दालें और बीन्स: मूंग की दाल, मसूर, राजमा, छोले और अन्य फलियां प्लांट-बेस्ड प्रोटीन और आयरन का अच्छा माध्यम हैं, जो रिकवरी में मदद करती हैं।

  • भरपूर मात्रा में पानी पिएं: स्तनपान कराने वाली महिलाओं को अपने हाइड्रेशन का विशेष ध्यान रखना चाहिए और दिनभर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए। शरीर में पानी की कमी होने से थकान और कमजोरी महसूस हो सकती है।

  • तिल और अलसी (Flaxseeds) के बीज: इन बीजों में हेल्दी फैट, मिनरल्स और कैल्शियम होते हैं, जिन्हें संतुलित आहार का हिस्सा बनाकर आसानी से खाया जा सकता है।

  • ताजे मौसमी फल: पपीता, केला, संतरा, सेब और जामुन जैसे फल विटामिन, एंटी-ऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स से भरपूर होते हैं।

ब्रेस्ट मिल्क बढ़ाने और स्वास्थ्य के लिए जरूरी उपयोगी टिप्स

  • अपने नवजात शिशु को उसकी मांग के अनुसार बार-बार और सही पोजीशन में स्तनपान कराएं।

  • हर फीड के दौरान दोनों स्तनों से दूध पिलाने की कोशिश करें ताकि मिल्क सप्लाई संतुलित रहे।

  • प्रसव के बाद पर्याप्त नींद लें और जितना हो सके मानसिक आराम करें।

  • अपने ऊपर किसी भी प्रकार का मानसिक तनाव हावी न होने दें।

  • हमेशा घर का बना ताजा, संतुलित और पौष्टिक आहार ही अपनी डाइट में शामिल करें।

  • किसी भी प्रकार के हर्बल सप्लीमेंट्स या पाउडर का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर या लैक्टेशन कंसल्टेंट की राय जरूर लें।

विशेष नोट: केवल किसी एक खास खाद्य पदार्थ के खाने से अचानक दूध का उत्पादन नहीं बढ़ने लगता। दुग्ध निर्माण की यह पूरी प्रक्रिया मुख्य रूप से शिशु द्वारा नियमित और प्रभावी रूप से स्तनपान करने, मां के समग्र पोषण, पर्याप्त तरल पदार्थों के सेवन और उसके मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। यदि दूध कम बनने की समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बच्चे का वजन संतोषजनक रूप से न बढ़ रहा हो, तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक या शिशु विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।