ट्रंप का बड़ा बयान: “मैं न होता तो तुम जेल में होते”, नेतन्याहू को चेतावनी

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वॉशिंगटन/तेल अवीव: इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच बढ़ते सैन्य टकराव और दक्षिणी बेरुत पर इजरायली हमलों के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच बेहद तीखी बातचीत की खबर सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स (विशेष रूप से अमेरिकी न्यूज वेबसाइट एक्सियोस और न्यूयॉर्क पोस्ट) के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच हुई इस फोन कॉल के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप बेहद गुस्से में थे और उन्होंने बेहद कड़े व तल्ख शब्दों का इस्तेमाल किया।

ट्रंप की इस नाराजगी की मुख्य वजह यह है कि इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे हमलों के कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण शांति वार्ता खटाई में पड़ती दिख रही है।

'पूरी तरह पागल हो चुके हो' – फोन कॉल की इनसाइड स्टोरी

अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लीक हुई जानकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने बेरुत में इजरायली हमलों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए नेतन्याहू से इन कार्रवाइयों को तुरंत रोकने के लिए कहा। बातचीत के दौरान ट्रंप ने नेतन्याहू से यहां तक कह दिया:

"तुम पूरी तरह पागल हो चुके हो। अगर मैं न होता, तो तुम आज जेल में होते (नेतन्याहू के भ्रष्टाचार ट्रायल के संदर्भ में)। मैं तुम्हारी जान बचा रहा हूं। इस समय तुम्हारी इन हरकतों की वजह से हर कोई तुमसे और इजरायल से नफरत कर रहा है।"

रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप इस बात से नाराज थे कि इजरायल सिर्फ एक हिज्बुल्लाह कमांडर को निशाना बनाने के लिए पूरी इमारतें तबाह कर रहा है, जिससे वैश्विक स्तर पर इजरायल अलग-थलग पड़ रहा है।

ईरान की बातचीत से पीछे हटने की धमकी

यह विवाद तब और गहरा गया जब सोमवार को लेबनान के दक्षिणी सैदा जिले के मारवानियेह कस्बे पर इजरायली हमला हुआ, जिसमें एक महिला और दो बच्चों समेत छह लोगों की मौत हो गई। लेबनान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इन मौतों की पुष्टि की है। इस सैन्य कार्रवाई के बाद, ईरान ने साफ कर दिया कि वह अमेरिका के साथ चल रही शांति वार्ता को सस्पेंड (स्थगित) कर देगा, क्योंकि अमेरिका इजरायल को लेबनान में आगे बढ़ने से नहीं रोक पा रहा है।

UNIFIL की भूमिका पर उठे सवाल

जैसे-जैसे इजरायली सैनिक दक्षिणी लेबनान के अंदर गहराई तक प्रवेश कर रहे हैं, वहां संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन UNIFIL (United Nations Interim Force in Lebanon) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का पूछना है कि जब इस मिशन का मुख्य काम ही युद्धविराम की निगरानी करना और क्षेत्र में शांति बनाए रखना है, तो यह इजरायली सेना को आगे बढ़ने से रोकने में नाकाम क्यों साबित हो रहा है।

अपने फैसले पर अड़े रहे नेतन्याहू

अमेरिकी राष्ट्रपति की इस भारी नाराजगी और फटकार के बावजूद इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने सख्त रुख पर अड़े हुए हैं। इस फोन कॉल के बाद नेतन्याहू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अपनी बात रखते हुए साफ किया:

  • उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को स्पष्ट बता दिया है कि इजरायल का रुख बिल्कुल नहीं बदला है।

  • अगर हिज्बुल्लाह ने इजरायली शहरों और नागरिकों पर हमले बंद नहीं किए, तो इजरायल बेरुत में उसके आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाना जारी रखेगा।

  • इसके साथ ही, इजरायली डिफेंस फोर्सेज (IDF) दक्षिणी लेबनान में अपनी जमीनी कार्रवाई को जारी रखेंगी।