चमत्कारी वैक्सीन का दावा, कैंसर कोशिकाओं को बनने से पहले ही रोकेगी

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कैंसर का नाम सुनते ही आज भी लोगों के मन में गहरा डर और अनिश्चितता पैदा हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में होने वाली हर छह मौतों में से एक की वजह कैंसर है। चिंताजनक बात यह है कि अब कम उम्र के युवा भी इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, मेडिकल साइंस ने इस दिशा में एक और चमत्कारी सफलता हासिल की है। सर्वाइकल और लिवर कैंसर के टीकों के बाद, अब वैज्ञानिकों ने दो और घातक कैंसर—कोलोरेक्टल (आंत) और ओवेरियन (अंडाशय)—के जोखिम को जड़ से खत्म करने वाली एक क्रांतिकारी वैक्सीन विकसित करने की जानकारी दी है।

इस नई वैक्सीन को 'लिंचवैक्स' (LynchVax) नाम दिया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य कैंसर होने के बाद उसका इलाज करना नहीं, बल्कि शरीर में कैंसर बनने की प्रक्रिया को शुरू होने से पहले ही रोकना है। यह वैक्सीन शरीर के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को इस तरह प्रशिक्षित करेगी कि वह कैंसर पैदा करने वाली असामान्य कोशिकाओं को उनके शुरुआती चरण में ही पहचानकर नष्ट कर दे।

आनुवंशिक खतरे 'लिंच सिंड्रोम' पर होगा कड़ा प्रहार

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल जल्द ही शुरू होने वाले हैं। यह शोध विशेष रूप से उन लोगों पर केंद्रित है जो 'लिंच सिंड्रोम' नामक जेनेटिक समस्या से जूझ रहे हैं।

  • क्या है खतरा: लिंच सिंड्रोम से पीड़ित व्यक्तियों में पेट, आंत और गर्भाशय के कैंसर होने की संभावना 80 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

  • वंशानुगत समस्या: जीन में म्यूटेशन के कारण यह खतरा एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में हस्तांतरित होता है।

  • जागरूकता की कमी: अकेले ब्रिटेन में करीब 1.75 लाख लोग इस सिंड्रोम से प्रभावित हैं, लेकिन उनमें से मात्र 5 प्रतिशत को ही इस खतरे की जानकारी है।

इम्यून सिस्टम को मिलेगा कैंसर से लड़ने का 'ब्लूप्रिंट'

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और दिग्गज वैक्सीन निर्माता कंपनी मॉडर्ना के आपसी सहयोग से यह परीक्षण किया जा रहा है। इस दौरान प्रतिभागियों को mRNA-4194 नामक वैक्सीन दी जाएगी।

  • ट्रायल का लक्ष्य: वैज्ञानिक यह देखेंगे कि वैक्सीन की कौन सी खुराक सबसे प्रभावी है और क्या यह पूरी तरह सुरक्षित है।

  • अगला चरण: बड़े स्तर पर इस वैक्सीन की प्रभावशीलता जांचने के लिए अध्ययन का दूसरा चरण 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।

  • कार्यप्रणाली: यह mRNA तकनीक शरीर को उन संदिग्ध कोशिकाओं की पहचान करना सिखाएगी जो भविष्य में कैंसर का रूप ले सकती हैं।

विशेषज्ञों की राय: एक वैक्सीन, कई खतरों से सुरक्षा

इस शोध का नेतृत्व कर रहे ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ प्रोफेसर डेविड चर्च के अनुसार, लिंच सिंड्रोम वाले मरीजों में जीवनभर अलग-अलग तरह के कैंसर विकसित होने का डर रहता है। कई बार मरीजों को एक साथ या एक के बाद एक अलग-अलग अंगों में कैंसर हो जाता है।

प्रोफेसर चर्च का कहना है कि उन्होंने जिन जैविक लक्ष्यों (टारगेट्स) को इस वैक्सीन के लिए चुना है, वे लिंच सिंड्रोम से जुड़े लगभग सभी प्रकार के कैंसरों में पाए जाते हैं। इसका मतलब है कि यदि यह वैक्सीन सफल रहती है, तो यह एक साथ कई अंगों के कैंसर से सुरक्षा कवच प्रदान करेगी।

कैंसर मुक्त भविष्य की उम्मीद

आमतौर पर कैंसर का इलाज तब शुरू होता है जब बीमारी शरीर में फैल चुकी होती है, लेकिन 'लिंचवैक्स' इस धारणा को बदल देगी। यदि यह ट्रायल सफल साबित होता है, तो यह चिकित्सा विज्ञान के इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक होगी। यह न केवल आनुवंशिक रूप से कमजोर लोगों की जान बचाएगी, बल्कि भविष्य में अन्य प्रकार के कैंसरों को रोकने के लिए भी एक मजबूत आधार तैयार करेगी।