गठबंधन से इनकार, पंजाब में BJP का फुल स्ट्राइक प्लान

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चंडीगढ़पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी प्रांतीय चुनावों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। पार्टी ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव की सभी 117 सीटों पर बिना किसी गठबंधन के, अकेले अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरेगी। इस बड़े राजनैतिक फैसले को अमलीजामा पहनाने के लिए शुक्रवार देर रात देश की राजधानी नई दिल्ली में भाजपा की पंजाब इकाई के शीर्ष पदाधिकारियों की एक उच्चस्तरीय मैराथन बैठक आयोजित की गई। इस गोपनीय बैठक में राज्य के मौजूदा सियासी समीकरणों, जमीनी स्तर पर सांगठनात्मक तैयारियों और भावी चुनावी खाके को लेकर बेहद गहन विमर्श किया गया।

बूथ स्तर पर संगठन का कायाकल्प और स्वतंत्र विकल्प पेश करने का आकलन

पार्टी के केंद्रीय और प्रांतीय नेतृत्व ने पंजाब के भीतर संगठन की संरचना को जमीनी स्तर यानी पोलिंग बूथ तक बेहद चाक-चौबंद बनाने का निर्देश दिया है। इसके तहत नए ऊर्जावान चेहरों को दल से जोड़ने और समाज के हर तबके के बीच अपनी पैठ बढ़ाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। आंतरिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा के रणनीतिकारों का यह स्पष्ट मानना है कि राज्य में हाल के दिनों में पार्टी के प्रति जनसमर्थन और जनाधार में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी सकारात्मक रुख को देखते हुए पार्टी आलाकमान ने यह तय किया है कि किसी अन्य दल की बैसाखी का सहारा लेने के बजाय मतदाताओं के समक्ष एक सशक्त और स्वतंत्र राजनैतिक विकल्प प्रस्तुत किया जाए, जिसके तहत सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की सहमति बनी है।

पारंपरिक दलों से जनता का मोहभंग और विकास व सुरक्षा के मुद्दों पर घेराबंदी

भाजपा के रणनीतिकारों का आकलन है कि पंजाब के लोग सूबे की पारंपरिक क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियों की नीतियों से पूरी तरह ऊब चुके हैं और उनके भीतर मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को लेकर असंतोष गहराता जा रहा है। पार्टी इस बदलते जनमानस का लाभ उठाने के लिए एक व्यापक जनसंपर्क अभियान शुरू करने जा रही है। इस रणनीति के अंतर्गत अन्नदाताओं (किसानों), बेरोजगार युवाओं, महिलाओं, व्यापारिक संगठनों और शहरी मतदाताओं को साधने के लिए विशेष कमेटियां बनाई जाएंगी। इसके साथ ही वर्तमान राज्य सरकार की प्रशासनिक विफलताओं, चरमराती कानून-व्यवस्था, बेरोजगारी की मार, नशे के बढ़ते जाल और रुके हुए औद्योगिक विकास जैसे ज्वलंत मुद्दों को भाजपा अपने चुनावी प्रचार का मुख्य हथियार बनाएगी।

कार्यकर्ताओं को चुनावी मोड में आने का निर्देश और सूबे में बहुकोणीय मुकाबले के आसार

दिल्ली में संपन्न हुई इस अहम रणनीतिक बैठक के बाद पार्टी हाईकमान ने सभी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को तत्काल प्रभाव से चुनावी मोड में सक्रिय होने का फरमान सुना दिया है। साथ ही हर एक निर्वाचन क्षेत्र में सांगठनात्मक रैलियों और गतिविधियों को तेज करने के लिए कहा गया है ताकि पार्टी प्रत्येक सीट पर सीधे मुकाबले की स्थिति में आ सके। हालांकि, उम्मीदवारों के नामों की आधिकारिक स्क्रूटनी और टिकटों का औपचारिक वितरण आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से होगा, लेकिन इस बैठक ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि भाजपा किसी बड़े मोर्चे का हिस्सा नहीं बनेगी। यदि भाजपा इस 'एकला चलो' की नीति पर अडिग रहती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव एक दिलचस्प बहुकोणीय और ऐतिहासिक मुकाबले में तब्दील हो जाएगा।