सरकार की कर्जमाफी शर्तों के खिलाफ सड़क पर उतरे एनसीपी विधायक रोहित पवार

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पुणे: महाराष्ट्र में किसानों की कर्ज माफी का मुद्दा एक बार फिर सुलग उठा है। पुणे के समीप धार्मिक नगरी पंढरपुर में इस मांग को लेकर एक बड़ा जन-आंदोलन शुरू हो गया है, जहाँ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के फायरब्रांड विधायक रोहित पवार बेमियादी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। शनिवार को उनके अनशन का दूसरा दिन है। रोहित पवार का सीधा आरोप है कि राज्य सरकार की नई कर्ज माफी योजना में शामिल की गईं पेचीदा शर्तें असल में अन्नदाताओं के साथ धोखा हैं। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि जब तक सरकार इन जनविरोधी शर्तों को वापस नहीं लेती, तब तक उनका यह आंदोलन समाप्त नहीं होगा।

बिना शर्त पूर्ण कर्ज मुक्ति की मांग

कर्जत-जामखेड़ विधानसभा सीट से विधायक रोहित पवार ने शुक्रवार से इस अनशन की शुरुआत की थी। उनका स्पष्ट रुख है कि राज्य के संकटग्रस्त किसानों का पूरा कर्ज बिना किसी नियम या बंदिश के माफ किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने हाल ही में 'पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर शेतकरी कर्ज-मुक्ति योजना' की घोषणा की है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सरकार का दावा है कि वह तिजोरी से 36,585 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है, जिससे प्रदेश के लगभग 56 लाख किसानों को सीधा फायदा पहुँचेगा। इस योजना में पूर्ण कर्ज माफी और वन टाइम सेटलमेंट (OTS) जैसे विकल्प सुझाए गए हैं, लेकिन तकनीकी बारीकियों के कारण जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।

ये दो शर्तें बनीं किसानों के लिए मुसीबत

विधायक रोहित पवार ने मुख्य रूप से सरकार की दो गाइडलाइंस पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है, जिन्हें वे किसानों के लिए घातक मान रहे हैं:

  1. सीमित राहत की शर्त: पहली शर्त के मुताबिक, जिन किसानों ने साल 2019 में आई पिछली कर्ज माफी योजना का लाभ उठाया था, उन्हें इस नई योजना के तहत अधिकतम केवल 50,000 रुपये तक की ही छूट या मदद दी जाएगी।

  2. भविष्य के भुगतान का दबाव: दूसरी और सबसे जटिल शर्त यह है कि यदि किसानों को सरकार की प्रोत्साहन सब्सिडी (Incentive Subsidy) चाहिए, तो उन्हें वित्त वर्ष 2025-26 और चालू वित्त वर्ष 2026-27 के फसल ऋणों (Crop Loans) का भुगतान बिल्कुल समय पर करना होगा।

आंदोलनकारियों का तर्क: रोहित पवार का कहना है कि जो किसान पहले से ही सूखे, बेमौसम बारिश और आर्थिक तंगी के कारण डिफाल्टर हो चुका है, वह भविष्य के कर्ज को समय पर चुकाने की गारंटी कैसे दे सकता है? सरकार को कागजी नियमों के बजाय किसानों की व्यावहारिक लाचारी को समझना होगा।

योजना के दायरे से बाहर हो रहे हैं 37 लाख अन्नदाता

रोहित पवार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, यदि सरकार इन दोनों शर्तों को वापस नहीं लेती है, तो महाराष्ट्र के 37 लाख से अधिक किसान सीधे तौर पर इस कर्ज माफी के लाभ से वंचित हो जाएंगे। वे इसे किसानों के अधिकारों पर कुठाराघात मान रहे हैं।

पंढरपुर में चल रहे इस आंदोलन को बल देने के लिए रोहित पवार के पिता और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र पवार भी अनशन स्थल पर पहुँचे और उन्होंने युवाओं व किसानों के इस संघर्ष को अपना पूर्ण समर्थन दिया। आंदोलनकारियों का हौसला बुलंद है और वे सरकार की नीतियों में बड़े बदलाव की उम्मीद लगाए हुए हैं।