इस्लामाबाद: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और एक स्थायी शांति समझौते की दिशा में दुनिया को बड़ी सफलता मिलने की उम्मीद है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शनिवार को इस वैश्विक घटनाक्रम पर महत्वपूर्ण बयान देते हुए कहा कि दोनों पक्ष शांति समझौते के अब तक के सबसे करीबी बिंदु पर पहुँच चुके हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि अगले 24 घंटों के भीतर इस समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। पाकिस्तान भी इस ऐतिहासिक प्रक्रिया का हिस्सा बनने के लिए पूरी तरह तैयार है और समझौते के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से इस पर हस्ताक्षर करेगा, जिसके बाद तकनीकी स्तर की चर्चाएं शुरू होंगी।
स्थायी शांति के लिए मजबूत आधार: प्रधानमंत्री शरीफ
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस कूटनीतिक प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया के दौरान निरंतर सहयोग के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का आभारी है। उन्होंने इस क्षेत्र के अन्य सहयोगी देशों के प्रति भी आभार प्रकट किया। शरीफ ने विश्वास व्यक्त किया कि यह ऐतिहासिक कदम क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए एक मजबूत नींव का काम करेगा।
खुल सकता है 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज', वैश्विक तेल बाजारों को मिलेगी राहत
यदि यह समझौता सफलतापूर्वक संपन्न हो जाता है, तो इसे फरवरी से जारी भारी तनाव के बाद विश्व की सबसे बड़ी कूटनीतिक जीत माना जाएगा।
रणनीतिक महत्व: इस समझौते से ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के पुनः खुलने का रास्ता साफ हो जाएगा।
आर्थिक प्रभाव: इससे वैश्विक तेल बाजारों में अस्थिरता कम होगी और शिपिंग (समुद्री व्यापार) में आने वाली बाधाएं दूर होंगी, जिससे एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध का मंडराता खतरा भी टल जाएगा।
प्रस्तावित शांति समझौते के मुख्य बिंदु
अमेरिकी प्रशासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, इस समझौते को चरणों में लागू किया जाएगा:
तात्कालिक लक्ष्य: सबसे पहले मौजूदा सैन्य टकराव और संघर्ष को पूरी तरह समाप्त करने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को व्यापार के लिए फिर से खोलने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा: समझौते पर हस्ताक्षर होने के अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े तकनीकी विषयों पर बातचीत शुरू होगी। इसमें ईरान के पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम के भंडार के प्रबंधन या उसे नष्ट करने जैसी जटिल प्रक्रियाएं शामिल हैं।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी सकारात्मक संकेत देते हुए कहा है कि परमाणु से जुड़े विषयों को वार्ता के दूसरे चरण में अंतिम रूप दिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि गहराई से चर्चा की आवश्यकता हुई, तो आपसी सहमति से समय-सीमा को आगे भी बढ़ाया जा सकता है।









