पुणे: महाराष्ट्र के प्रमुख आईटी और शैक्षिक केंद्र पुणे शहर पर इस साल पानी का एक बड़ा संकट मंडरा रहा है। मानसून के आगमन में हो रही देरी और अल-नीनो (El-Niño) के बढ़ते प्रभाव के चलते मौसम विभाग द्वारा कम बारिश की आशंका जताए जाने के बाद, महाराष्ट्र जल संसाधन विभाग ने पुणे महानगर पालिका (PMC) को एक गंभीर चेतावनी जारी की है। बांधों में पानी का स्तर बेहद निचले पायदान पर पहुंच गया है, जिसके चलते प्रशासन को पानी के इस्तेमाल को लेकर बेहद कड़े और आपातकालीन कदम उठाने पड़ रहे हैं।
चार बांधों पर निर्भरता, पर अब बचा है सिर्फ 3 TMC पानी
पुणे शहर को मुख्य रूप से चार प्रमुख बांधों — खडकवासला, पानशेत, वरसगाव और टेम्घर से पानी की आपूर्ति की जाती है। इसके अलावा, भामा आस्खेड और पवना बांध से भी आंशिक रूप से पानी लिया जाता है।
शहर की मेयर मंजूषा नागपुरे ने मौजूदा संकट की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए बताया कि इन बांधों में अब कुल मिलाकर केवल 5,000 मिलियन क्यूबिक फीट (यानी 5 TMC) पानी ही शेष रह गया है। इसमें से भी तकनीकी कारणों और वाष्पीकरण को हटाकर शहर के वास्तविक उपभोग के लिए महज 3 TMC पानी ही उपलब्ध है।
सोमवार से एक दिन छोड़कर सप्लाई, टैंकरों को चेतावनी
इस सीमित पानी के स्टॉक को कम से कम 20 अगस्त या अगस्त के अंत तक खींचने के लिए पुणे प्रशासन ने सोमवार से शहर में एक दिन छोड़कर (अल्टरनेट डेज) पानी की सप्लाई करने का बड़ा फैसला लिया है।
दैनिक बचत: इस कटौती से शहर में प्रतिदिन लगभग 400 मिलियन लीटर (MLD) पानी की बचत होगी।
दाम न बढ़ाने की अपील: मेयर ने निजी पानी के टैंकर ऑपरेटरों को सख्त हिदायत देते हुए अपील की है कि वे शहर की इस मजबूरी और संकट का फायदा उठाकर पानी के दाम न बढ़ाएं।
स्विमिंग पूल और वॉटर वाशिंग सेंटर्स पर लगा ताला
पानी की बर्बादी को रोकने के लिए म्युनिसिपल कमिश्नर नवल किशोर राम ने नगर निगम को पूरी तरह 'एक्शन मोड' में डाल दिया है:
मनोरंजन और सर्विसिंग पर रोक: शहर के सभी पब्लिक और प्राइवेट स्विमिंग पूल तथा गाड़ियां धोने वाले 'वॉटर वाशिंग सेंटर्स' को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है।
कंस्ट्रक्शन साइट्स पर पाबंदी: बिल्डरों और निर्माण कंपनियों द्वारा नगर निगम के पीने वाले पानी के इस्तेमाल को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। उन्हें केवल बोरवेल, कुएं या सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के रीसायकल पानी का उपयोग करने की अनुमति होगी। उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
हाउसिंग सोसायटियों और होटलों के लिए 'ग्रे वॉटर' रीसायकल अनिवार्य
कमिश्नर ने सभी बड़ी हाउसिंग सोसायटियों के लिए अपने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को चौबीसों घंटे चालू रखना अनिवार्य कर दिया है। इसके साथ ही होटलों, रेस्टोरेंट्स और हॉस्टलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कपड़े या बर्तन धोने से निकलने वाले 'ग्रे वॉटर' (गंदे पानी) को रीसायकल करें और उसका उपयोग बागवानी या फ्लशिंग के लिए करें।
भामा आस्खेड क्षेत्र को राहत: भामा आस्खेड बांध से जुड़े इलाकों में फिलहाल यह कटौती लागू नहीं होगी, क्योंकि वहां के निवासियों को पहले से ही तकनीकी कारणों से मटमैला पानी मिल रहा है।
2013-14 जैसे सूखे की नौबत से बचने की तैयारी
प्रशासन के अनुसार, इस जल कटौती को पूरे पुणे में रोटेशन और एरिया के हिसाब से धीरे-धीरे लागू किया जाएगा ताकि अचानक वाटर प्रेशर बदलने से मुख्य पाइपलाइन फटने जैसी कोई तकनीकी समस्या खड़ी न हो। मेयर मंजूषा नागपुरे ने साल 2013-14 के भीषण सूखे के दिनों को याद करते हुए कहा कि उस समय शहर ने सालभर तक भारी जल संकट झेला था। वैसी भयावह स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसीलिए प्रशासन आज से ही ये कड़े कदम उठा रहा है ताकि आने वाले दिनों में पुणे की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए मोहताज न होना पड़े।









