कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय बड़ा भूचाल आ गया जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 लोकसभा सांसदों ने बगावत कर त्रिपुरा की 'नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया' (एनसीपीआई) के साथ जाने और एनडीए सरकार को समर्थन देने का दावा किया। इस बड़े सियासी उलटफेर के बाद विपक्षी दलों से लेकर टीएमसी के बागी नेताओं तक की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
बागी सांसदों ने ममता और अभिषेक बनर्जी पर बोला हमला
काकोली घोष दस्तीदार: बागी सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई से अधिक यानी 20 सांसद हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर संसद में अलग बैठने की मांग की है और स्पष्ट किया है कि वे एनसीपीआई में विलय करके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एनडीए के साथ मिलकर काम करेंगे।
अरूप चक्रवर्ती: टीएमसी नेतृत्व पर सीधा हमला बोलते हुए बागी सांसद अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि कोई भी पार्टी किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं होती। ममता बनर्जी परिवार के दबाव में काम कर रही थीं और पार्टी का पतन तब शुरू हुआ जब सारी जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को सौंप दी गई। उन्होंने सवाल उठाया कि हार के बाद नेतृत्व सांसदों के साथ बैठक बुलाने से क्यों डर रहा है?
आसित कुमार माल: उन्होंने बगावत का बचाव करते हुए कहा कि जनता और क्षेत्र के विकास के हित में यह नया समूह बनाया गया है क्योंकि टीएमसी में रहकर विकास संभव नहीं था। चुनावी हार के बाद पार्टी ने कोई समीक्षा बैठक नहीं की, इसलिए इस टूट की जिम्मेदारी खुद नेतृत्व को लेनी चाहिए।
सपा और कांग्रेस के नेताओं की प्रतिक्रिया
रामगोपाल यादव (समाजवादी पार्टी): फिरोजाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए सपा नेता ने बागी सांसदों पर कड़ा गुस्सा निकाला। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को ममता बनर्जी ने फर्श से उठाकर मंत्री, विधायक और सांसद बनाया, वे ही आज उन्हें धोखा दे रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भाजपा पर क्षेत्रीय दलों को खत्म करने और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया।
अशोक गहलोत (कांग्रेस): राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कहा कि इस समय 'इंडिया' गठबंधन को और मजबूत करने की जरूरत है और राहुल गांधी को गठबंधन का नेता घोषित किया जाना चाहिए। उन्होंने भाजपा पर धार्मिक ध्रुवीकरण करने का आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दलों से लोकतंत्र बचाने के लिए एकजुट होने की अपील की।
विलय पर क्या कहा एनसीपीआई ने?
एनसीपीआई के संस्थापक और राष्ट्रीय संगठन सचिव शांतनु डे ने कहा कि उन्हें इस बड़े घटनाक्रम की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने बागी सांसदों का स्वागत करते हुए कहा, "अगर मेरी पार्टी बड़ी होती है तो मुझे खुशी ही होगी। हम प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों का समर्थन करते हैं और एनडीए के साथ मिलकर देश के लिए काम करना चाहते हैं।" उन्होंने बताया कि इस मुद्दे पर जल्द ही एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी।
टीएमसी के 20 सांसदों की इस बगावत ने ममता बनर्जी के सामने अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे राष्ट्रीय राजनीति की सरगर्मियां बढ़ गई हैं।









