बढ़ी हुई बिजली दरों के खिलाफ कांग्रेस का मोर्चा, 17 और 18 जून को विरोध-प्रदर्शन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली के दामों में की गई वृद्धि को लेकर अब सियासी पारा चढ़ गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार के इस निर्णय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पहले से ही महंगाई की मार झेल रहे नागरिकों के लिए बिजली शुल्क में यह बढ़ोतरी बेहद चिंताजनक है, जिसके विरोध में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जाएगा।

सभी जिला मुख्यालयों में घेराव की रणनीति

रणनीति के मुताबिक, आगामी 17 जून को कांग्रेस प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में स्थित विद्युत विभाग के दफ्तरों के सामने उग्र प्रदर्शन करेगी। इस दौरान पार्टी के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता बढ़ी हुई दरों को वापस लेने की मांग को लेकर आवाज बुलंद करेंगे। कई जिलों में अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने के साथ-साथ आम जनता को इस फैसले के प्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाने की भी रूपरेखा तैयार की गई है।

अगले दिन संवाददाताओं से चर्चा कर रखी जाएगी बात

आंदोलन के दूसरे चरण में, 18 जून को कांग्रेस की ओर से जिला स्तर पर संवाददाताओं से चर्चा (प्रेस वार्ता) की जाएगी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इस संवाद के जरिए वे आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त भार और शासन की नीतियों को जनता के सामने विस्तार से उजागर करेंगे। कांग्रेस इस विषय को पूरी तरह जनहित से जोड़कर एक बड़ा आंदोलन बनाने की योजना पर काम कर रही है।

आगामी 1 जुलाई से प्रभावी होंगी संशोधित दरें

गौरतलब है कि प्रदेश में लागू की गईं ये नई दरें 1 जुलाई से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगी। इस संशोधित व्यवस्था के दायरे में घरेलू उपयोग, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और कृषि क्षेत्र से जुड़े सभी उपभोक्ता आएंगे। इस फेरबदल के बाद आम नागरिकों के मासिक बिजली बजट में अच्छी-खासी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

नियामक आयोग और शासन की दलील

दूसरी ओर, राज्य विद्युत नियामक आयोग ने इस वृद्धि को जायज ठहराते हुए कहा है कि बिजली के उत्पादन और वितरण में आने वाली लागत बढ़ने के कारण दरों में यह आंशिक संशोधन बेहद जरूरी हो गया था। आयोग ने स्पष्ट किया है कि सीमित बिजली का उपभोग करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 'बिल हाफ योजना' पहले की तरह ही सुचारू रूप से लागू रहेगी, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग पर इसका असर काफी हद तक नियंत्रित रहेगा।

बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी

बिजली बिलों में बढ़ोतरी का यह मामला अब राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र बन चुका है। जहां एक तरफ विपक्ष इसे जनविरोधी फैसला बताकर सड़क पर उतरने को तैयार है, वहीं दूसरी तरफ सत्तापक्ष इसे ऊर्जा विभाग की वित्तीय स्थिरता और व्यवस्था को बनाए रखने के लिए उठाया गया एक आवश्यक कदम बता रहा है। आने वाले दिनों में रायपुर समेत पूरे प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गहमागहमी और तेज होने के आसार हैं।