पुण्यतिथि पर स्वामी विवेकानंद को श्रद्धांजलि, PM मोदी बोले- दुनिया तक पहुंचाया भारत का आध्यात्मिक संदेश

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नई दिल्ली। महान आध्यात्मिक चिंतक और युवाओं के शाश्वत प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की पुण्यतिथि के सुअवसर पर शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित देश के कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' के जरिए देशवासियों से अपनी भावनाएं साझा करते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय सनातन संस्कृति, दर्शन और राष्ट्रीय चेतना को वैश्विक पटल पर एक नई और गौरवमयी पहचान दिलाई। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि स्वामी जी की प्रखर बौद्धिकता और उनके ओजस्वी विचार आज भी देश के करोड़ों युवाओं का सटीक मार्गदर्शन कर रहे हैं, तथा उनका आध्यात्मिक संदेश 'विकसित भारत' के राष्ट्रीय संकल्प को सिद्ध करने में देश को नई ऊर्जा और गति प्रदान करता रहेगा।

केंद्रीय रक्षा और कृषि मंत्रियों ने याद किए स्वामी जी के संदेश

इस पावन स्मृति दिवस पर देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्वामी जी को नमन करते हुए कहा कि उन्होंने विश्व मंच पर देशभक्ति, नैतिक उत्थान, समाज सेवा और सुदृढ़ चरित्र निर्माण का कालजयी संदेश दिया था। उनका अटूट विश्वास था कि संस्कारित और आत्मविश्वासी नागरिक ही किसी भी देश की वास्तविक संप्रभुता और शक्ति होते हैं। वहीं, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वामी विवेकानंद को अपने जीवन का सर्वोच्च आदर्श बताते हुए उनके उस प्रसिद्ध कथन को स्मरण किया जिसमें उन्होंने मनुष्य को ईश्वर का अंश और अनंत शक्तियों का अक्षय भंडार बताया था। उन्होंने कहा कि 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए' का उनका अमर महामंत्र सदैव मानव जाति के कल्याण और नवनिर्माण का मार्ग प्रशस्त करता रहेगा।

स्वास्थ्य और शिक्षा मंत्रियों ने राष्ट्रवादी चिंतन को सराहा

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने स्वामी जी के निर्वाण दिवस पर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उन्हें एक ऐसा युगद्रष्टा बताया जिन्होंने अपने अद्वितीय ज्ञान और ओजस्वी व्यक्तित्व के बल पर संपूर्ण मानवता को सेवा और राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ाया। स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, स्वामी जी का जीवन-दर्शन हमें सदैव जनकल्याण और देश के उत्थान के पथ पर अग्रसर रहने की शक्ति देता है। इसी क्रम में, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी उन्हें नमन करते हुए कहा कि स्वामी जी के राष्ट्रवादी चिंतन ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर एक अमिट प्रतिष्ठा प्रदान की, जो वर्तमान पीढ़ी के भीतर आत्मविश्वास और राष्ट्रप्रेम की भावना को निरंतर प्रगाढ़ कर रही है।

शिकागो के ऐतिहासिक विमर्श से मिली थी वैश्विक पहचान

सांस्कृतिक इतिहास के पन्नों को पलटें तो ज्ञात होता है कि स्वामी विवेकानंद, जिनका मूल और वास्तविक नाम नरेंद्रनाथ दत्त था, महान संत रामकृष्ण परमहंस के परम शिष्य और रामकृष्ण मिशन के दूरदर्शी संस्थापक थे। उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ी ख्याति वर्ष 1893 में अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित 'विश्व धर्म संसद' में दिए गए उनके ऐतिहासिक और कालजयी व्याख्यान से मिली थी, जहां उन्होंने भारतीय दर्शन की उदारता से पाश्चात्य जगत को रूबरू कराया था। उन्होंने अपने संपूर्ण जीवनकाल में मानव सेवा और दीन-दुखियों की सहायता को ही ईश्वर की सच्ची आराधना और धर्म का सर्वोच्च आदर्श मानकर समाज को एक नई दिशा दिखाई थी।