जयपुर। राजस्थान पुलिस ने पिछले छह महीनों के कामकाज और कामयाबी का लेखा-जोखा पेश किया है। पुलिस मुख्यालय में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने बताया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अब केवल घटना के बाद की कार्रवाई नहीं, बल्कि अपराध को रोकने (प्रिवेंटिव पुलिसिंग), अपराधियों की आर्थिक ताकत को खत्म करने और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है। इसका असर जमीन पर भी दिखने लगा है और राज्य में गंभीर अपराधों के ग्राफ में भारी गिरावट आई है।
अपराधों के ग्राफ में गिरावट और पुलिस की आक्रामक कार्रवाई
पुलिस आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 की पहली छमाही (जनवरी से जून) की तुलना में साल 2026 की इसी अवधि में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत दर्ज होने वाले कुल मामलों में 4.65 प्रतिशत की कमी आई है। पिछले साल जहां 99,272 मामले सामने आए थे, वहीं इस साल यह संख्या घटकर 94,652 रह गई है।
गंभीर अपराधों की बात करें तो पुलिस की मुस्तैदी से हत्या के मामलों में 4.41%, हत्या के प्रयास में 11.17%, डकैती में 16.28% और लूट की वारदातों में 19.93% की बड़ी कमी आई है। इसके अलावा अपहरण में 4.72%, दुष्कर्म के मामलों में 13.36%, पॉक्सो (POCSO) एक्ट में 20.90% और एससी-एसटी (SC-ST) एक्ट के मामलों में 18.81% की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं दूसरी ओर, अपराधियों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता बढ़ने से लोकल और स्पेशल एक्ट के तहत दर्ज मुकदमों में 4.25% की बढ़ोतरी हुई है।
रिकवरी रेट में बड़ा सुधार और माफियाओं की संपत्ति पर बुलडोजर
संपत्ति से जुड़े अपराधों में पुलिस ने चोरी और लूट का माल बरामद करने की अपनी क्षमता (रिकवरी रेट) को काफी बेहतर किया है:
लूट के मामले: बरामदगी 71% से बढ़कर 79.09% हुई।
नकबजनी (घर में चोरी): रिकवरी का आंकड़ा 9.58% से सीधे छलांग लगाकर 58.24% पर पहुंच गया।
सामान्य चोरी: रिकवरी 10.34% से बढ़कर 24.79% हो गई।
नशा तस्करों और अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है, जिसके चलते एनडीपीएस (NDPS) एक्ट के तहत करीब 30 प्रतिशत (29.94%) ज्यादा मामले दर्ज किए गए हैं। पुलिस ने राज्य के 20 जिलों में 224 ऐसे इलाकों (हॉटस्पॉट) की पहचान की है जहां ड्रग्स का धंधा ज्यादा था। इन इलाकों में अभियान चलाकर बड़े ड्रग तस्करों की करोड़ों रुपये की अवैध संपत्तियों को जमींदोज (ध्वस्त) किया गया है।
महिला सुरक्षा: आधी हुई जांच की अवधि
महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को रोकने के साथ-साथ पुलिस ने उनके मामलों की जांच को जल्द से जल्द पूरा करने पर फोकस किया है। दुष्कर्म के मामलों में जहां पहले जांच पूरी होने में औसतन 81 दिन लगते थे, उसे घटाकर अब 52 दिन कर दिया गया है। इसी तरह पॉक्सो एक्ट के मामलों में जांच का समय 78.2 दिन से कम करके 51.2 दिन पर ले आया गया है। जमीन पर महिलाओं की सुरक्षा और मदद के लिए कालिका पेट्रोल यूनिट, एंटी रोमियो स्क्वाड, सुरक्षा सखी और वन स्टॉप क्राइसिस सेंटर जैसी प्रणालियों को पहले से कहीं ज्यादा एक्टिव किया गया है।
साइबर ठगों पर कड़ा प्रहार और 'डिजिटल अरेस्ट' पर एक्शन
इंटरनेट के जरिए होने वाली ठगी से निपटने के लिए राजस्थान के सभी 41 पुलिस जिलों में अब साइबर पुलिस स्टेशन पूरी तरह काम कर रहे हैं। साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 की क्षमता को बढ़ाने के साथ ही आम जनता की सुविधा के लिए दो नए व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए गए हैं।
हाल के दिनों में चर्चा में आए 'डिजिटल अरेस्ट' (डरा-धमका कर ऑनलाइन बंधक बनाना) के मामलों में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 174 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा है और पीड़ितों के करीब 52 करोड़ रुपये से अधिक की रकम को बैंक खातों में होल्ड (फ्रीज) कराया है। इसके अलावा, 1.84 लाख खोए या चोरी हुए मोबाइलों का पता लगाया गया, जिनमें से 61 हजार से अधिक मोबाइल उनके असली मालिकों को सौंपे जा चुके हैं।
भविष्य का रोडमैप: पुलिस महानिदेशक के अनुसार, आने वाले समय में सीआईडी (सीबी), एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स मिलकर काम करेंगी। इनका मुख्य टारगेट बड़े ड्रग माफिया, रंगदारी (फिरौती) मांगने वाले गैंगस्टर्स और संगठित अपराध करने वाले गिरोह होंगे। इन अपराधियों की काली कमाई से बनाई गई संपत्तियों को कुर्क और जब्त किया जाएगा। जो अपराधी देश छोड़कर भाग गए हैं, उन्हें विदेशों से वापस लाने (प्रत्यर्पण) की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, 'राजस्थान साइबर क्राइम कंट्रोल सेंटर' की स्थापना को प्राथमिकता दी जा रही है।









