अयोध्या के चढ़ावा मामले से नेपाल में आहत भावनाएं, जनकपुर में उठी आवाज

0
8

जनकपुर/अयोध्या। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान और चढ़ावे की चोरी की घटना के बाद, पड़ोसी देश नेपाल में माता सीता के मायके 'जनकपुर' में भारी नाराजगी और चिंता का माहौल है। जनकपुर के प्रसिद्ध जानकी मंदिर से जुड़े संतों, महंतों और आम श्रद्धालुओं ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट से दोषियों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।

'चढ़ावे की चोरी' से आहत हुई जनकपुर की भावनाएं

जानकी मंदिर के महंत रोशन दास ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के मंदिर में इस प्रकार की चोरी की घटना की कभी कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने याद दिलाया कि जनवरी 2024 में जब रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी, तब जनकपुर से माता सीता के मायके की ओर से पारंपरिक गृहप्रवेश और मांगलिक रीतियों के अनुसार भारी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण, वस्त्र और अनेक अमूल्य उपहार (भार) अयोध्या भेजे गए थे। ऐसे में मंदिर के खजाने और चढ़ावे में चोरी की खबर ने जनकपुर के श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है।

सावन में अयोध्या जाएगा जनकपुर का प्रतिनिधिमंडल

महंत रोशन दास ने जानकारी दी है कि उन्होंने इस संबंध में अयोध्या में मंदिर से जुड़े कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों से फोन पर संपर्क कर पूरी घटना का ब्योरा लिया है। उन्होंने बताया कि आगामी सावन के पवित्र महीने में जनकपुर से संतों और श्रद्धालुओं का एक विशेष प्रतिनिधिमंडल अयोध्या यात्रा पर जाएगा। यह प्रतिनिधिमंडल वहां भगवान श्रीराम के दर्शन करने के साथ-साथ चढ़ावे और दान की सुरक्षा को लेकर अपनी गहरी चिंताओं से मंदिर प्रशासन को अवगत कराएगा। जनकपुर के विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने उम्मीद जताई है कि भारतीय सुरक्षा एजेंसियां इस मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द से जल्द दोषियों को सलाखों के पीछे भेजेंगी, ताकि पूरी दुनिया के रामभक्तों का विश्वास अयोध्या धाम में बना रहे।

राम दरबार और मां सीता की स्थापना न होने पर भी उठे सवाल

इस विवाद के बीच, जनकपुर के धार्मिक हलकों में एक और विषय को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, अयोध्या के नवनिर्मित मुख्य मंदिर के गर्भगृह में वर्तमान में केवल रामलला (बाल स्वरूप) की मूर्ति स्थापित है और वहां 'राम दरबार' या मां सीता की स्थापना नहीं की गई है। जनकपुर के लोगों का कहना है कि यह शायद इतिहास का ऐसा पहला प्रमुख राम मंदिर है, जहां प्रभु श्रीराम के साथ माता सीता को स्थापित नहीं किया गया है। इस विषय को लेकर भी जनकपुरी के संतों और मिथिलांचल के समाज में तरह-तरह के कयास और असंतोष की स्थिति बनी हुई है।