19 प्रसूताओं की मौत पर सवाल, मंत्री पहले हंसे फिर बोले— ‘बाकी बातें ब्रेक के बाद’

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जयपुर। राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद लगातार हो रही माताओं की मौतों के बीच सूबे के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर का एक ताजा बयान बड़े विवाद की वजह बन गया है। राज्य में नवजात शिशुओं को जन्म देने के बाद अब तक कुल 18 प्रसूताओं की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 50 महिलाओं के गंभीर रूप से बीमार होने की खबर है। ऐसे बेहद संवेदनशील और गंभीर घटनाक्रम के बीच आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वास्थ्य मंत्री का हल्के अंदाज में मुस्कुराना और "बाकी बातें ब्रेक के बाद करेंगे" कहना विपक्ष के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भारी आक्रोश का कारण बन गया है।

तीन घंटे की लंबी समीक्षा बैठक के बाद भी नहीं तय हुई जिम्मेदारी

स्वास्थ्य मंत्री ने जयपुर में विभाग के आला अधिकारियों के साथ इस गंभीर मुद्दे पर करीब तीन घंटे तक मैराथन बैठक की। लेकिन इस लंबी बैठक के बाद जब वे मीडिया के सामने आए, तो मौतों के सटीक कारणों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। मंत्री कभी डिहाइड्रेशन, कभी किडनी फेल होना तो कभी अन्य शारीरिक जटिलताओं का हवाला देते हुए नजर आए। पत्रकारों के बार-बार पूछने पर भी वे यह बताने में नाकाम रहे कि आखिर इन मौतों का असली जिम्मेदार कौन है और इतने दिन बीत जाने के बाद भी किसी स्तर पर जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई।

तीखे सवालों के बीच मुस्कुराते हुए बोले बाकी बातें ब्रेक के बाद

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब पत्रकारों ने मौतों के आंकड़ों, जांच की सुस्त रफ्तार और दोषियों पर होने वाली कार्रवाई को लेकर तीखे सवाल पूछने शुरू किए, तो स्वास्थ्य मंत्री असहज नजर आने लगे। इसी बीच वे अचानक अपनी सीट से खड़े हो गए और चेहरे पर मुस्कान लाते हुए गैर-जिम्मेदाराना लहजे में बोले कि बाकी बातें अब ब्रेक के बाद करेंगे। संवेदनशील मामले पर आए इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है, जिसके बाद लोग सरकार की कार्यशैली और पीड़ितों के प्रति संवेदनहीनता को लेकर जमकर खिंचाई कर रहे हैं।

लगातार बढ़ रहा मौतों का आंकड़ा और बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था

प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं और प्रसूताओं की मौतों का आंकड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही के दिनों में बांसवाड़ा में पांच और भीलवाड़ा में चार महिलाओं की जान जा चुकी है, जबकि इससे पहले कोटा, बीकानेर और जोधपुर से भी ऐसे ही दुखद मामले सामने आ चुके हैं। इस पूरे प्रकरण में अब तक कुल 18 प्रसूताओं की मौत हो चुकी है और करीब 50 महिलाएं विभिन्न अस्पतालों में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुलकर सामने आ गई है।

जांच के घेरे में ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार

इस पूरे मामले की शुरुआती जांच में प्रसव के दौरान महिलाओं को दिए जाने वाले ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के एक खास बैच पर गंभीर संदेह जताया गया है। आशंका व्यक्त की जा रही है कि इस बैच की दवाइयां मानकों के अनुरूप नहीं थीं और वे बेहद घटिया क्वालिटी की थीं जिसके चलते महिलाओं की तबीयत बिगड़ी। इस बड़े संदेह के बावजूद सरकार ने अब तक किसी भी मामले की अंतिम फॉरेंसिक या चिकित्सकीय जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है, जिससे विभाग की मंशा पर लगातार गंभीर सवाल उठ रहे हैं।