इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मेट्रो परियोजना के दूसरे चरण का काम भले ही अभी तक पूरी तरह पटरी पर नहीं उतरा हो और यात्रियों के लिए इसका व्यावसायिक संचालन शुरू न हुआ हो, लेकिन स्थानीय नगर निगम ने इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को एक बड़ा झटका देते हुए 8 करोड़ रुपये का भारी-भरकम डिमांड बिल थमा दिया है। नगर निगम की ओर से गांधी नगर स्थित मेट्रो डिपो और शहर में बने 5 मेट्रो स्टेशनों के एवज में यह डिमांड लेटर भेजा गया है, जिसमें मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन से बकाया सेवा प्रभार (सर्विस चार्ज) की तत्काल मांग की गई है। नगर निगम का कड़ा रुख है कि वर्ष 2025 से 2026 की इस अवधि तक का सर्विस चार्ज अभी तक जमा नहीं कराया गया है, जिसे लेकर दोनों विभागों के बीच पत्राचार तेज हो गया है।
अकेले गांधी नगर मेट्रो डिपो पर बकाया है 5 करोड़ से ज्यादा का सर्विस चार्ज
नगर निगम द्वारा इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन को भेजे गए इस आधिकारिक डिमांड लेटर के अनुसार, कुल बकाये में से अकेले गांधी नगर डिपो का सर्विस चार्ज ही 5 करोड़ रुपये से अधिक का है। इसके अलावा, जो 5 मेट्रो स्टेशन बनकर पूरी तरह तैयार हो चुके हैं, उन पर 27 लाख रुपये से ज्यादा का अतिरिक्त सेवा प्रभार बकाया चल रहा है। निगम का अनुमान है कि जब शहर के सभी 17 मेट्रो स्टेशनों को इस सूची में शामिल कर लिया जाएगा, तो कुल सर्विस चार्ज की यह बकाया राशि बढ़कर लगभग 8 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी। नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि मेट्रो कॉर्पोरेशन द्वारा समय रहते इस बकाया सर्विस चार्ज का भुगतान नहीं किया जाता है, तो नियमानुसार परिसरों को सील करने की सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
क्या कहती है नगर निगम और मेट्रो कॉर्पोरेशन की दलील?
नगर निगम का पक्ष: निगम का तर्क है कि मेट्रो डिपो और स्टेशनों के आसपास के सम्पूर्ण क्षेत्र में बुनियादी नागरिक सेवाएं मुहैया कराई जा रही हैं। स्टेशनों के इर्द-गिर्द साफ-सफाई की व्यवस्था, जल निकासी (ड्रेनेज) और हाई-मास्ट व स्ट्रीट लाइट जैसी तमाम सुविधाएं नगर निगम द्वारा लगातार दी जा रही हैं, जिसके एवज में सर्विस चार्ज वसूलना कानूनी रूप से वैध है।
मेट्रो कॉर्पोरेशन का पक्ष: दूसरी ओर, इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का कहना है कि जब अभी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन (व्यावसायिक संचालन) शुरू ही नहीं हुआ है, और आम जनता के लिए ट्रेनें पटरी पर नहीं उतरी हैं, तो ऐसे में किस आधार पर नगर निगम द्वारा सर्विस चार्ज की मांग की जा रही है?
फिलहाल करोड़ों रुपये के इस सर्विस चार्ज को लेकर दोनों प्रमुख प्रशासनिक निकायों के बीच खींचतान जारी है, और देखना यह होगा कि इस वित्तीय विवाद का क्या समाधान निकलता है।









