‘अलग-अलग मजहबी तौल कांटा नहीं चलेगा’, UCC पर सीएम यादव का बड़ा बयान

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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में भारी गहमागहमी और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पारित हो गया। चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद कड़े तेवरों में राज्य सरकार का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि समाज में समानता हमारी सनातन संस्कृति की आत्मा है। जब ईश्वर की नज़र में हर व्यक्ति एक समान है, तो फिर इंसानों के बनाए कानूनों में धर्म के आधार पर दोहरा मापदंड क्यों होना चाहिए? उन्होंने दोहा दोहराते हुए कहा कि देश में सभी के लिए एक जैसा कानून होना बेहद जरूरी है।

एक संविधान और समान व्यवस्था पर जोर

सदन में अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम, रहीम, रविंद्र, रॉबिन, अमर, एंथोनी और अकबर—हर नागरिक के लिए देश में केवल एक ही संविधान होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि इस विधेयक के कानून बनते ही प्रदेश में हर तरह के कानूनी भेदभाव का अंत हो जाएगा। राज्य में अब किसी के लिए अलग मजहबी पैमाना नहीं होगा और सभी नागरिकों को एक ही दृष्टिकोण से देखा जाएगा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश अब देश में उत्तराखंड, गुजरात और असम जैसी समानतावादी व्यवस्था लागू करने वाले राज्यों की कतार में मजबूती से शामिल हो गया है।

विपक्ष के दोहरे चरित्र और तुष्टिकरण पर हमला

विपक्ष के लगातार हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने कांग्रेस की नीतियों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष हमेशा से तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति करता आया है। उनके खाने के दांत और दिखाने के दांत पूरी तरह अलग हैं और जनता उनके इस पाखंड को भली-भांति समझ चुकी है। डॉ. यादव ने सवाल उठाया कि जब एक पिता अपने दो बेटों में फर्क नहीं करता, तो कोई सरकार अपने नागरिकों को अलग-अलग नजरिए से कैसे देख सकती है?

आंबेडकर के संविधान का दिया हवाला

मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि विपक्ष को संविधान निर्माता बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और भारतीय संविधान के प्रति जरा सा भी सम्मान है, तो उन्हें इस ऐतिहासिक विधेयक का खुलकर समर्थन करना चाहिए था। उन्होंने विधेयक पर अपने सुझाव देने के लिए प्रदेश की जनता का आभार जताया। हालांकि मुख्यमंत्री के पूरे संबोधन के दौरान कांग्रेसी विधायक सदन में लगातार नारेबाजी और हंगामा करते रहे, लेकिन सरकार ने सदन के पटल पर अपनी बात पूरी मजबूती के साथ रखी।