इंग्लैंड के क्लब क्रिकेट जगत से हाल ही में एक बेहद अजीबोगरीब और अनोखा विवाद सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक बड़ी बहस छेड़ दी है। इस अनूठी घटना को सोशल मीडिया पर 'क्लिकगेट' और 'क्लिकी पोंटिंग' जैसे दिलचस्प नाम दिए जा रहे हैं। यह पूरा मामला नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग के डिवीजन-2 के अंतर्गत खेले गए एक मुकाबले से जुड़ा हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस घटना के सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद खेल प्रेमियों के बीच चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है, और संबंधित क्रिकेट लीग ने भी इस पूरे प्रकरण की औपचारिक जाँच शुरू कर दी है।
क्या है पूरा ‘क्लिकगेट’ विवाद?
नॉर्थ यॉर्कशायर एंड साउथ डरहम क्रिकेट लीग डिवीजन-2 के एक रोमांचक मुकाबले के दौरान साल्टबर्न क्रिकेट क्लब सेकेंड इलेवन और नॉर्टन क्रिकेट क्लब की टीमें आमने-सामने थीं। मैच के दौरान यह सारा विवाद नॉर्टन टीम के बल्लेबाज नोमन शबीर के विकेट को लेकर खड़ा हुआ। बल्लेबाज शबीर जब क्रीज पर डटे हुए थे, तब विरोधी टीम के गेंदबाज द्वारा फेंकी गई एक गेंद उनके बल्ले के बेहद करीब से गुजरी और विकेटकीपर के हाथों में चली गई।
घटना के दौरान बल्लेबाज का स्पष्ट दावा था कि गेंद उनके बल्ले को छूकर नहीं निकली थी। हालांकि, इसी बीच स्लिप फील्डिंग पोजीशन में खड़े विपक्षी टीम के एक फील्डर ने चालाकी दिखाते हुए अपनी उंगली चटका दी (Finger Clicking), जिससे एक तेज आवाज पैदा हुई। इस संदिग्ध आवाज के आते ही विकेटकीपर द्वारा गेंद लपकते ही पूरी फील्डिंग टीम ने जोरदार अपील कर दी। मैदान पर मौजूद अंपायर को भी यह भ्रम हुआ कि यह तीखी आवाज गेंद के बल्ले से टकराने के कारण ही आई है, और उन्होंने बिना देर किए बल्लेबाज को आउट (कैच आउट) करार दे दिया।
बल्लेबाज द्वारा मैदानी अंपायर के फैसले का विरोध
पवेलियन लौटने से पहले बल्लेबाज नोमन शबीर ने अंपायर के इस निर्णय का कड़ा विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि गेंद ने उनके बल्ले का बिल्कुल भी स्पर्श नहीं किया था। साथ ही, उन्होंने स्लिप में खड़े उस फील्डर की ओर इशारा करते हुए अंपायर को बताया कि जो आवाज सुनाई दी थी, वह बल्ले की नहीं बल्कि फील्डर द्वारा उंगली चटकाने से आई थी। हालाँकि, मैदानी अंपायर ने नियमों का हवाला देते हुए अपने फैसले को पलटने से इनकार कर दिया और उसे बरकरार रखा। इस पूरी घटना का वीडियो अब इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है और तेजी से वायरल हो रहा है। चूँकि इस स्तर के क्लब मैचों में डीआरएस (DRS) यानी डिसीजन रिव्यू सिस्टम की सुविधा उपलब्ध नहीं होती है, इसलिए बल्लेबाज को अंपायर के फैसले के आगे झुकना पड़ा और निराश होकर पवेलियन लौटना पड़ा।
साल्टबर्न क्लब पर पहले भी लग चुके हैं इस तरह के गंभीर आरोप
यह पहला मौका नहीं है जब साल्टबर्न क्रिकेट क्लब किसी अनुचित हरकत या इस तरह के अजीबो-गरीब आरोपों के घेरे में आया हो। सोशल मीडिया पर यह विवाद तूल पकड़ने के बाद कई पुराने वीडियो भी धड़ल्ले से वायरल हो रहे हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि इसी क्लब के खिलाड़ियों द्वारा पूर्व के मैचों में भी इस प्रकार की संदिग्ध हरकतें की जा चुकी हैं।









