ब्रेस्टफीडिंग के दौरान इन बातों का रखें खास ध्यान, मां और शिशु दोनों रहेंगे स्वस्थ

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नवजात शिशु के लिए मां का दूध उसका पहला, सबसे शुद्ध और संपूर्ण आहार माना जाता है, क्योंकि इसमें तमाम ऐसे आवश्यक पोषक तत्व और प्राकृतिक एंटीबॉडीज मौजूद होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) को बेहद मजबूत बनाते हैं। शिशु के इसी बेहतर स्वास्थ्य और माताओं को इसके प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से हर साल 1 से 7 अगस्त तक 'वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक' यानी विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है।

यदि आपके परिवार या घर-परिवार में कोई महिला नवजात शिशु को स्तनपान करा रही है, तो यह केवल अकेली मां की ही जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि पूरे परिवार का कर्तव्य बनता है कि उसे पूर्ण शारीरिक और मानसिक सहयोग प्रदान किया जाए। मां का सही खानपान, पर्याप्त नींद, मानसिक तनाव से दूरी और साफ-सफाई जैसी छोटी-छोटी बातें स्तनपान की प्रक्रिया को बेहद आसान और शिशु के लिए सुरक्षित बनाती हैं।

आइए जानते हैं कि स्तनपान कराने वाली माताओं और उनके परिजनों को किन महत्वपूर्ण बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, ताकि मां और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ रह सकें।

स्तनपान कराने वाली मां के लिए जरूरी बातें

  • संतुलित और पौष्टिक आहार लें:

    • मां के भोजन में प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स से भरपूर चीजों को शामिल किया जाना चाहिए।

    • अपने रोजमर्रा के खाने में दूध, दही, हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, अंडे, ड्राई फ्रूट्स (मेवे) और ताजे मौसमी फलों को जरूर जगह दें।

  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं:

    • स्तनपान कराने के दौरान शरीर को सामान्य दिनों की तुलना में अधिक पानी की आवश्यकता होती है।

    • शरीर में पानी की कमी न होने दें और दिनभर में कम से कम 2.5 से 3 लीटर पानी पीने का प्रयास करें।

  • भरपूर आराम करें:

    • नवजात की देखभाल के चलते नींद की कमी होना आम है, जिससे अत्यधिक थकान बढ़ सकती है।

    • इसलिए जब भी बच्चा सोए, मां को भी उस वक्त विश्राम करने की कोशिश करनी चाहिए।

  • तनाव मुक्त रहें:

    • अत्यधिक मानसिक तनाव या चिंता शरीर में दूध बनने की प्रक्रिया (लैक्टेशन) को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है।

    • ऐसे में परिवार का सकारात्मक सहयोग होना सबसे ज्यादा जरूरी है।

  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें:

    • कई बार कुछ दवाइयां स्तनपान के दौरान सुरक्षित नहीं मानी जातीं, क्योंकि उनका असर दूध के जरिए बच्चे तक पहुँच सकता है।

    • किसी भी प्रकार की दवा का सेवन करने से पहले हमेशा चिकित्सक या स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य करें।

  • धूम्रपान और शराब से पूरी तरह दूरी बनाएं:

    • किसी भी तरह के नशे, सिगरेट या शराब का सेवन बच्चे के नाजुक स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव डाल सकता है। इनसे पूरी तरह परहेज करें।

  • साफ-सफाई और स्वच्छता का रखें ख्याल:

    • बच्चे को दूध पिलाने से पहले अपने हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोएं।

    • स्तनों की सामान्य स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें ताकि संक्रमण का कोई खतरा न रहे।

इस कठिन समय में परिवार कैसे कर सकता है मदद?

  • नई मां को समय पर और पौष्टिक रूप से तैयार भोजन उपलब्ध कराएं।

  • घर के छोटे-मोटे कार्यों और बच्चे की देखभाल में हाथ बंटाकर मां का बोझ कम करें।

  • यह सुनिश्चित करें कि मां को दिनभर में पर्याप्त आराम का समय मिले।

  • प्रसव के बाद के नाजुक दौर में उसे मानसिक और भावनात्मक रूप से मजबूत सहयोग दें।

स्तनपान के क्या हैं अचूक फायदे?

शिशु के लिए:

  • बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) मजबूत होती है।

  • सर्दी, जुकाम, दस्त और अन्य खतरनाक संक्रमणों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

  • शिशु का मानसिक और शारीरिक विकास बहुत बेहतर तरीके से होता है।

मां के लिए:

  • प्रसव के बाद गर्भाशय (uterus) जल्दी अपनी सामान्य स्थिति में वापस आता है।

  • डिलीवरी के बाद शरीर की रिकवरी तेजी से होती है।

  • स्तन और ओवेरियन कैंसर का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है।

  • मां और शिशु के बीच का भावनात्मक जुड़ाव (बॉन्डिंग) और अधिक मजबूत होता है।