भोपाल। मध्य प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक पारदर्शी और हाईटेक बनाने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत अब पात्र हितग्राहियों को राशन दुकानों से खाद्यान्न प्राप्त करने के लिए 'डिजिटल टोकन' प्रणाली का उपयोग करना होगा। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) यानी 'डिजिटल रुपये' का सहारा लिया जाएगा। प्रायोगिक तौर पर इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत सबसे पहले भोपाल और इंदौर शहरों से की जा रही है।
दिसंबर 2026 तक पूरे प्रदेश में लागू करने का लक्ष्य
खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के अनुसार, भारत सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मध्य प्रदेश के भोपाल और इंदौर का चयन किया है। दिसंबर 2026 तक इसे प्रदेश की सभी उचित मूल्य दुकानों पर पूर्णतः लागू करने की समयसीमा तय की गई है। व्यवस्था लागू होने के बाद लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में प्रतिमाह उनकी पात्रता के अनुसार सीबीडीसी टोकन भेजे जाएंगे, जिसे राशन दुकान पर क्यूआर (QR) कोड स्कैन करके गेहूं और चावल लिया जा सकेगा।
आधार और राशन कार्ड का होगा सत्यापन, लीकेज रोकने में मिलेगी मदद
इस योजना के सुचारु संचालन के लिए पंजाब नेशनल बैंक (PNB), एनआईसी और खाद्य विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। योजना का लाभ देने के लिए सबसे पहले लाभार्थियों के आधार और राशन कार्ड डेटा का मिलान, मोबाइल सत्यापन और ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसके बाद लाभार्थियों को 'PNB डिजिटल रुपया ऐप' से जोड़ा जाएगा।
डिजिटल पीडीएस प्रयोग की प्रमुख विशेषताएं:
पहली बार डिजिटल रुपये का प्रयोग: राशन वितरण में देश का संभवतः पहला ऐसा प्रयोग जहां डिजिटल करेंसी के माध्यम से खाद्यान्न दिया जाएगा।
पारदर्शिता और लीकेज पर रोक: इस कैशलेस और पेपरलेस प्रणाली से सब्सिडी के दुरुपयोग, फर्जीवाड़े और कालाबाजारी पर पूरी तरह अंकुश लगेगा।
आसान प्रक्रिया: लाभार्थी अपने मोबाइल से केवल क्यूआर कोड स्कैन कर किसी भी उचित मूल्य दुकान से अपना राशन प्राप्त कर सकेंगे।
व्यापक विस्तार की योजना: भोपाल और इंदौर में सफल परीक्षण के बाद इसे पूरे मध्य प्रदेश और तत्पश्चात देश के अन्य राज्यों में लागू करने का रास्ता साफ होगा।









