जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर से पाटन तक बनने वाली बहुप्रतीक्षित फोरलेन सड़क परियोजना तकनीकी और वित्तीय बाधाओं के चलते फिलहाल अटक गई है। मध्य प्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमपीआरडीसी) ने लगभग 21 किलोमीटर लंबी इस सड़क को चार लेन में तब्दील करने के लिए 190 करोड़ रुपये की लागत वाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर शासन को भेजी थी, लेकिन यातायात मानकों और लागत पर उठ रहे सवालों के कारण मामला वित्त समिति के पास विचाराधीन है।
परियोजना की चर्चाओं के बीच क्षेत्र में जमीनों के दामों में आया भारी उछाल
इस महत्वपूर्ण फोरलेन परियोजना के प्रस्तावित होने के बाद से ही जबलपुर-पाटन मार्ग के आसपास जमीनों की कीमतों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली है। पिछले कुछ वर्षों में सड़क मार्ग से लगे इलाकों में बड़े पैमाने पर भू-खरीद फरोख्त हुई है, जहां कई निवेशकों ने भविष्य की व्यावसायिक योजनाओं और आवासीय कॉलोनियों के मद्देनजर जमीनें खरीदी हैं, और अब वे इस प्रोजेक्ट को जल्द स्वीकृति दिलाने के लिए प्रयासरत हैं।
यातायात मानकों पर खरी नहीं उतरी योजना और लागत पर भी उठे गंभीर सवाल
इंडियन रोड कांग्रेस (आईसीआरसी) के नियमों के अनुसार किसी मार्ग को फोरलेन बनाने के लिए पर्याप्त ट्रैफिक लोड होना अनिवार्य है, जबकि जबलपुर-पाटन मार्ग पर हुए सर्वे में प्रतिदिन का ट्रैफिक मानक निर्धारित सीमा से कम पाया गया है। इसके अलावा, लगभग 21 किलोमीटर के दायरे के लिए आंकी गई 190 करोड़ रुपये की लागत यानी प्रति किलोमीटर करीब नौ करोड़ रुपये के खर्च को लेकर भी वित्तीय परीक्षण के दौरान आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
सख्त तकनीकी और वित्तीय परीक्षण के बाद ही तय होगा परियोजना का भविष्य
विशेषज्ञों के अनुसार, सड़क विकास से जुड़ी ऐसी योजनाओं का मूल्यांकन केवल स्थानीय मांग के आधार पर नहीं बल्कि आर्थिक व्यवहार्यता और ट्रैफिक सर्वे के आधार पर किया जाता है। फिलहाल यह पूरा प्रोजेक्ट तय मापदंडों और वित्तीय समीक्षा की कसौटी पर अटका हुआ है, और प्रशासनिक हरी झंडी मिलने के बाद ही इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।








