कोलकाता: पश्चिम बंगाल के कूचबिहार जिले के अंतर्गत आने वाले सीताई क्षेत्र में सोमवार रात एक नाटकीय और दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। लोकसभा चुनाव और उसके बाद बदले राजनीतिक हालातों के चलते करीब तीन महीने से अपने क्षेत्र से दूर रहे टीएमसी सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया और उनकी पत्नी व विधायक संगीता रॉय जब सोमवार रात अपने घर लौटे, तो स्थानीय लोगों का विरोध शुरू हो गया। हालात को भांपते हुए दोनों जनप्रतिनिधि कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच रात करीब दो बजे अपना घर छोड़कर कूचबिहार शहर के लिए रवाना हो गए।
क्यों हुआ सांसद और विधायक का विरोध?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सांसद जगदीश चंद्र बसुनिया और विधायक संगीता रॉय सोमवार की आधी रात को सीताई स्थित अपने आवास पर पहुंचे थे। उनके घर लौटने की खबर जैसे ही इलाके में फैली, कुछ ही देर में स्थानीय लोगों की भीड़ घर के बाहर जमा हो गई और नारेबाजी शुरू कर दी। हालांकि, विरोध प्रदर्शन कर रहे लोगों के पास किसी भी राजनीतिक दल का झंडा नहीं दिखाई दिया। बढ़ते तनाव और हंगामे को देखते हुए पुलिस बल मौके पर मौजूद रहा, लेकिन विरोध थमता न देख अंततः दंपती ने स्वेच्छा से वहां से निकल जाने का निर्णय लिया।
सांसद ने क्यों छोड़ा आधी रात को घर?
सांसद बसुनिया ने स्पष्ट किया कि वह घर पर रखे कुछ आवश्यक दस्तावेज लेने और अपने निर्वाचन क्षेत्र के हालात का जायजा लेने के लिए आए थे। उन्होंने कहा कि रात के समय कुछ लोगों द्वारा विरोध किए जाने के बाद, वह नहीं चाहते थे कि उनकी उपस्थिति की वजह से इलाके में किसी भी प्रकार का राजनीतिक तनाव बढ़े या क्षेत्र की कानून-व्यवस्था खतरे में पड़े। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए उन्होंने आधी रात को ही वहां से हटने का उचित समझा।
राजनीतिक हलचल और अंदरूनी कलह
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, सीताई से विधायक संगीता रॉय पिछले कुछ महीनों से अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं थीं, जिसके पीछे पारिवारिक कारणों और कोलकाता में बेटे के इलाज का हवाला दिया गया था। वहीं, कूचबिहार से सांसद बसुनिया के राजनीतिक रुख को लेकर भी क्षेत्र में चर्चाएं गर्म हैं।
इस बीच, राजनीतिक गलियारों में इस घटना को टीएमसी के भीतर चल रही अंदरूनी कलह और बागी खेमे से भी जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शन को लेकर भाजपा के कूचबिहार जिला अध्यक्ष अभिजीत बर्मन ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी ने इस प्रकार के किसी भी प्रदर्शन का आह्वान नहीं किया था और कार्यकर्ताओं को इससे दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन आम जनता के स्वतःस्फूर्त आक्रोश पर किसी का नियंत्रण नहीं हो सकता।









