जयपुर। राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं को अधिक नागरिक-केंद्रित, जवाबदेह और सक्षम बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान मिली है। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास के नेतृत्व में 'मिशन कर्मयोगी' के अंतर्गत आयोजित किए गए विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रमों की कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन (CBC) ने खुलकर प्रशंसा की है। कमीशन ने माना है कि उच्च प्रशासनिक स्तर पर अधिकारियों के कौशल संवर्धन और नैतिक शासन के प्रति राजस्थान का यह कदम पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत करता है।
एचसीएम रीपा में वरिष्ठ अधिकारियों का मंथन
हाल ही में 10 अगस्त को जयपुर स्थित एचसीएम रीपा में 'कर्मयोगी कर्तव्य कार्यक्रम' के वरिष्ठ अधिकारी संस्करण का आयोजन किया गया था। दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित इस विशेष कार्यशाला में राज्य शासन के लगभग 70 वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्य सचिव की अनूठी पहल और कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन के समन्वय से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोक प्रशासन में नैतिक मूल्यों, सेवा भावना और नागरिक आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशीलता को बढ़ावा देना था।
बदलती जरूरतों के अनुरूप क्षमता विकास पर जोर
कार्यशाला के दौरान आधुनिक शासन व्यवस्था की चुनौतियों और नागरिकों की बढ़ती अपेक्षाओं पर गहराई से चर्चा हुई। उपस्थित अधिकारियों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि एक संवेदनशील प्रशासन वही है जो अपनी कार्यप्रणाली में समय के अनुसार सुधार करे। मिशन कर्मयोगी के मूल सिद्धांतों को अपनाते हुए अधिकारियों में दायित्व बोध, पारदर्शिता और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता को मजबूत करने के नए तरीकों पर विचार साझा किए गए।
शीर्ष नेतृत्व की सक्रियता की सराहना
कैपेसिटी बिल्डिंग कमीशन ने मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की पूरी कार्यशाला में स्वयं उपस्थित रहने और मार्गदर्शन देने के रुख को 'अनुकरणीय नेतृत्व' करार दिया। कमीशन का कहना है कि जब किसी राज्य का शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी खुद मूल्यों, पारदर्शिता और जन-केंद्रित शासन पर संवाद स्थापित करता है, तो इससे संपूर्ण प्रशासनिक ढांचे को प्रेरणा मिलती है और जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव की गति तेज होती है।
'विकसित भारत' के संकल्प की दिशा में मजबूत कदम
कमीशन के अनुसार, राजस्थान का यह प्रयास केवल एक प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के 'विकसित भारत' की उस सोच को साकार करता है जहाँ सिविल सेवा अधिक उत्तरदायी और कुशल हो। राज्य सरकार द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर शुरू की गई यह प्रक्रिया लोक सेवा प्रदायगी में सुधार लाने और आम नागरिकों का शासन-प्रशासन में विश्वास मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी।









