अमित शाह को लेकर संजय राउत का सनसनीखेज बयान, उपप्रधानमंत्री पद पर कही बड़ी बात

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नई दिल्ली। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा प्रहार करते हुए एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। राष्ट्रीय राजधानी में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देश के उपप्रधानमंत्री की कमान संभालना चाहते हैं और स्वयं को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराधिकारी घोषित कराना चाहते हैं। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी इसके सख्त खिलाफ हैं, जिससे दोनों शीर्ष नेताओं के बीच वैचारिक और प्रशासनिक मतभेद काफी बढ़ चुके हैं।

गृह मंत्री के राजनीतिक भविष्य पर उठाए गंभीर सवाल

संसद में गृह मंत्री के आगामी वक्तव्य से जुड़े प्रश्न पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने कहा कि गृह मंत्री का राजनीतिक प्रभाव अब समाप्त हो रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि आगामी केंद्रीय मंत्रिमंडल के पुनर्गठन के दौरान अमित शाह की कैबिनेट में उपस्थिति को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है। राउत ने आरोप लगाया कि देश में हो रही विभिन्न नकारात्मक स्थितियों के लिए गृह मंत्रालय का कामकाज जिम्मेदार है और अब प्रधानमंत्री को भी इस स्थिति का भान हो चुका है।

उपप्रधानमंत्री पद की मांग को लेकर खींचतान का दावा

शीर्ष नेतृत्व के बीच मतभेदों पर जोर देते हुए संजय राउत ने दावा किया कि उनकी जानकारी शत-प्रतिशत सटीक है। उन्होंने कहा कि अमित शाह नई परिस्थितियों में तुरंत उपप्रधानमंत्री पद हासिल करना चाहते हैं ताकि भविष्य की राह तय हो सके, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया है। राउत के अनुसार, पीएम मोदी के बाद गृह मंत्री के लिए प्रधानमंत्री पद का रास्ता आसान नहीं रहने वाला है।

2029 की राजनीतिक दिशा और ईवीएम पर बयान

भावी राजनीति पर बात करते हुए सांसद राउत ने कहा कि 2029 तक शीर्ष नेतृत्व के बने रहने पर भी अब सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश की युवा पीढ़ी आने वाले दिनों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के विरोध में बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकती है।

भाजपा के संगठनात्मक ढांचे पर हमला

भाजपा की आंतरिक संरचना पर सवाल उठाते हुए संजय राउत ने कहा कि वर्तमान में सत्तारूढ़ दल अन्य राजनीतिक दलों जैसे कांग्रेस, एनसीपी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं को जोड़कर बना है। उनका तर्क था कि इस प्रकार का आधार होने के कारण संगठन में कभी भी बड़ा बिखराव देखने को मिल सकता है। राउत के इस आक्रामक बयान के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।