स्मृति ईरानी की राज्यसभा वापसी की चर्चा, यूपी की 10 सीटों पर चुनावी हलचल तेज

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कोटे की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। आगामी चुनावों को लेकर सुगबुगाहट तेज है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस बार उम्मीदवारों के ऐलान से सबको चौंका सकती है, क्योंकि पार्टी की योजना अधिकांश नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारने की है। चर्चा है कि भाजपा की केंद्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी को उत्तर प्रदेश से उच्च सदन में भेजा जा सकता है, जिससे पार्टी महिला प्रतिनिधित्व के कोटे को भी मजबूती देगी। साथ ही, यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि संसद पहुंचने के बाद उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में भी अहम जिम्मेदारी मिल सकती है।

मौजूदा सांसदों के टिकट पर संशय और नए दावेदार

पार्टी इस बार उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के दो केंद्रीय मंत्रियों सहित कुछ मौजूदा सांसदों को दोबारा मौका देने को लेकर असमंजस में है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि डॉ. दिनेश शर्मा के अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनने के बाद खाली हुई ब्राह्मण कोटे की सीट पर हरीश द्विवेदी को उम्मीदवार बनाया जा सकता है, जिन पर केंद्रीय नेतृत्व का विशेष भरोसा है। वहीं, बीएल वर्मा का टिकट कटने की स्थिति में राजवीर सिंह राजू का नाम भी मजबूत दावेदारों में आगे चल रहा है। पार्टी गीता शाक्य और सीमा द्विवेदी के स्थान पर भी नए चेहरों की तलाश कर रही है, जिसमें गीता शाक्य की जगह उनके सजातीय ममतेश शाक्य समेत कई अन्य नाम रेस में शामिल हैं। इसके अलावा, ओबीसी कोटे से भाजपा के ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल और दलित चेहरों में विद्यासागर की दावेदारी भी मजबूती से उभरकर सामने आ रही है, जिससे स्पष्ट है कि पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने पर पूरा जोर दे रही है।

विधानसभा का संख्या बल और राजनीतिक समीकरण

वर्तमान में इन 10 सीटों में से आठ पर भाजपा, एक पर समाजवादी पार्टी (सपा) और एक पर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का कब्जा है। हालांकि, इस बार का यह गणित पूरी तरह भाजपा और सपा के बीच ही सिमटता नजर आ रहा है। बसपा के एकमात्र राज्यसभा सांसद रामजी गौतम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद संसद के उच्च सदन में बहुजन समाज पार्टी का प्रतिनिधित्व पूरी तरह शून्य हो जाएगा।

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी जल्द ही उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम मुहर लगाने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करेगी। मौजूदा विधानसभा के संख्या बल पर नजर डालें तो आगरा की फतेहाबाद सीट से भाजपा विधायक के निधन के बावजूद 403 सदस्यीय विधानसभा में एनडीए (भाजपा गठबंधन) के पास कुल 288 विधायक हैं, जिनमें अकेले भाजपा के 255 विधायक शामिल हैं। इसके विपरीत, समाजवादी पार्टी गठबंधन के पास लगभग 103 विधायक हैं, जिसके चलते संख्या बल के लिहाज से भाजपा का पलड़ा पूरी तरह भारी है।