जंगलों के झरनों और गाड़-गदेरों का रिकॉर्ड तैयार, पानी की स्थिति भी सामने आई

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देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों में जल संसाधनों की स्थिति को लेकर पहली बार आधिकारिक आंकड़े सामने आए हैं। वन विभाग द्वारा जुटाए गए इस डेटा से पता चला है कि बीते तीन सालों में जंगलों के भीतर मौजूद जलाशयों, टैंकों और तालाबों में पानी की मात्रा में दोगुने से भी अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

तीन वर्षों में पानी की स्थिति

वर्ष 2022-23 में जलाशयों और टैंक-तालाबों को मिलाकर कुल जल उपलब्धता करीब 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर थी। इसके बाद 2023-24 में यह बढ़कर 10.64 करोड़ क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई। वहीं, वर्ष 2024-25 के ताजा आंकड़ों के अनुसार, कुल जल उपलब्धता अब बढ़कर लगभग 12.63 करोड़ क्यूबिक मीटर दर्ज की गई है।

जलाशयों और तालाबों में रिकॉर्ड वृद्धि

  • टैंक और तालाब: 2022-23 (6.19 करोड़ क्यूबिक मीटर) की तुलना में 2024-25 (12.54 करोड़ क्यूबिक मीटर) में जल उपलब्धता में करीब 103 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

  • जलाशय: जलाशयों में उपलब्ध पानी 0.03497 करोड़ क्यूबिक मीटर से बढ़कर 0.08893 करोड़ क्यूबिक मीटर पहुंच गया है, जो प्रतिशत के लिहाज से लगभग 154 प्रतिशत का इजाफा दर्शाता है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगेगा अंकुश

जंगलों के भीतर जल स्रोतों का समृद्ध होना वन्यजीवों और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गर्मियों के दिनों में अक्सर पानी की तलाश में हिंसक और अन्य वन्यजीव रिहायशी इलाकों का रुख करते थे। जंगलों के अंदर ही पर्याप्त पानी उपलब्ध रहने से वन्यजीवों का आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन रुकेगा, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने में बड़ी मदद मिलेगी।