उज्जैन: श्रावण मास के अंतिम सोमवार के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का एक अत्यंत अलौकिक नजारा देखने को मिला। सप्ताहांत की रात त्रिवेणी संग्रहालय के समीप स्थित शक्तिपथ पर आयोजित 'शिवतत्व श्रावण कला उत्सव' के दौरान प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी सुमधुर प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को पूरी तरह शिवमय बना दिया।
सांस्कृतिक संध्या और कलाकारों की प्रस्तुतियां
शनिवार और रविवार की शाम आयोजित इस भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम में गायक सुंदरलाल मालवीय ने अपने पारंपरिक मालवीय लोक भजनों और शिव महिमा के गीतों से समा बांध दिया। इसके बाद लोकप्रिय गायक किशन भगत ने अपने अंदाज में एक से बढ़कर एक भक्ति भजनों की प्रस्तुतियां दीं। इस आयोजन का सबसे मुख्य आकर्षण प्रसिद्ध शिव भजन गायक हंसराज रघुवंशी की प्रस्तुति रही, जिनके सुरों पर उपस्थित श्रद्धालु झूम उठे और पूरा शक्तिपथ 'हर हर महादेव' के गगनभेदी जयकारों से गूंज उठा। सांस्कृतिक कार्यक्रम संपन्न होने के बाद किशन भगत, सुंदरलाल मालवीय और उनकी पूरी टीम ने सामान्य दर्शन किए, जबकि हंसराज रघुवंशी ने सोमवार तड़के सावन के आखिरी सोमवार यानी 24 अगस्त को सुबह की दिव्य भस्म आरती में शामिल होकर आशीर्वाद प्राप्त किया।
महाकाल की अलौकिक भस्म आरती और दिव्य श्रृंगार
श्री महाकालेश्वर मंदिर के आशीष पुजारी ने जानकारी देते हुए बताया कि श्रावण मास के चौथे एवं अंतिम सोमवार के अवसर पर तड़के ढाई बजे (02:30 AM) मंदिर के कपाट भस्म आरती के लिए खोले गए। इस दौरान बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने 'जय श्री महाकाल' के उदघोष के साथ भस्म आरती के दर्शन किए।
भस्म आरती संपन्न होने के बाद भगवान महाकाल का अत्यंत मनमोहक और भव्य श्रृंगार किया गया। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उज्जैन में होने वाली भस्म आरती का आध्यात्मिक महत्व अपने आप में अनूठा है। श्रृंगार के तहत भगवान को बहुमूल्य रजत मुकुट, आभूषण और नवीन वस्त्र अर्पित किए गए, जिसके बाद नैवेद्य अर्पण और सुबह की प्रातकालीन आरती की गई।
नगर भ्रमण पर निकलेंगे बाबा महाकाल
श्रावण के इस आखिरी सोमवार पर सुबह से ही मंदिर परिसर में भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। तड़के से ही श्रद्धालु पवित्र जल, दूध और बिल्वपत्र लेकर भगवान के दर्शन हेतु लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करते दिखे। मंदिर में दिनभर दर्शन का यह सिलसिला अनवरत जारी रहेगा। इसके पश्चात, शाम को ठीक 04:00 बजे बाबा महाकाल अपनी पारंपरिक सवारी के रूप में नगर भ्रमण पर निकलेंगे, और रात 07:00 बजे संध्या आरती भोग के बाद रात्रि 10:30 बजे शयन आरती के साथ मंदिर के पट आगामी रात्रि के लिए बंद कर दिए जाएंगे।








