नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के संगठन में नए घटनाक्रमों के बाद अब मोदी कैबिनेट में फेरबदल और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आने वाले दिनों में सबसे महत्वपूर्ण बदलाव पार्टी की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था 'संसदीय बोर्ड' में देखने को मिल सकते हैं।
फैसलों के केंद्र में संसदीय बोर्ड
भले ही बीजेपी संसदीय बोर्ड का आकार छोटा हो, लेकिन संगठन के भीतर इसकी भूमिका बेहद शक्तिशाली मानी जाती है। प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन करने से लेकर प्रमुख चुनावों में प्रत्याशियों के नाम तय करने तक के सभी बड़े और निर्णायक फैसले इसी बोर्ड के जरिए लिए जाते हैं।
शीर्ष तिकड़ी की जगह बरकरार रहने की संभावना
संभावित पुनर्गठन को लेकर आ रही खबरों के मुताबिक, बोर्ड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का बने रहना लगभग तय है। राजनाथ सिंह बोर्ड के सबसे वरिष्ठ सेवारत सदस्यों में से एक हैं। इसके अलावा, संगठन के प्रति उनकी भूमिका को देखते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव बी.एल. संतोष की मौजूदगी भी यथावत रहने की उम्मीद जताई जा रही है।
सात पदों पर फेरबदल की गुंजाइश
संसदीय बोर्ड में वर्तमान के सात अन्य पदों पर नए चेहरों को जगह मिलने या फेरबदल की संभावना है। वर्तमान में इन पदों पर जेपी नड्डा, बीएस येदियुरप्पा, सर्बानंद सोनोवाल, के. लक्ष्मण, इकबाल सिंह लालपुरा, डॉ. सुधा यादव और सत्यनारायण जटिया शामिल हैं।
जेपी नड्डा की भूमिका और क्षेत्रीय समीकरण
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री और पूर्व पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है। हालांकि, हिमाचल प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पार्टी के लिए उन्हें बोर्ड से अलग करना आसान फैसला नहीं होगा, क्योंकि इसका असर क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
मुख्यमंत्रियों की एंट्री पर कयास, योगी-फडणवीस आगे
इस बार संसदीय बोर्ड में राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल किए जाने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। इस रेस में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का नाम सबसे आगे चल रहा है। चर्चा है कि इन दोनों शीर्ष नेताओं के नामों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का भी समर्थन प्राप्त है, जिससे बोर्ड में उनकी दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है।









