गंगापुरसिटी। वजीरपुर और बामनवास नगर पालिका चुनाव के तहत नामांकन पत्रों की संवीक्षा (स्क्रूटनी) के बाद राजनीतिक दलों के चुनावी समीकरण पूरी तरह गड़बड़ा गए हैं। वजीरपुर में जहां भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख अध्यक्ष पद दावेदार का पर्चा खारिज होने से पार्टी को बड़ा झटका लगा है, वहीं बामनवास में भाजपा और कांग्रेस दोनों को ही बागियों की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
वजीरपुर में भाजपा के अध्यक्ष दावेदार का पर्चा निरस्त, कांग्रेस की निर्विरोध जीत तय
वजीरपुर पालिका चुनाव के वार्ड 14 से भाजपा प्रत्याशी मुकेश बैरवा का नामांकन पत्र आपराधिक मामलों के चलते निरस्त कर दिया गया है। बैरवा हाल ही में भाजपा में शामिल हुए थे और उन्हें अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। इस वार्ड से केवल कांग्रेस प्रत्याशी पूरनमल का पर्चा वैध रहने के कारण उनका निर्विरोध चुना जाना तय है। इसके अतिरिक्त, एक ही प्रस्तावक के दो नामांकनों में हस्ताक्षर होने के कारण वार्ड 13 से भाजपा के सामलिया का पर्चा भी खारिज हो गया।
तकनीकी चूक से कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा भी खारिज
छापेमारी और संवीक्षा के इस दौर में कांग्रेस को भी नुकसान उठाना पड़ा है। वजीरपुर के वार्ड 19 से कांग्रेस के अधिकृत उम्मीदवार उमेश चंद का नामांकन खारिज हो गया। जांच में सामने आया कि प्रत्याशी को टिकट वार्ड 19 से मिला था, लेकिन पर्चे में वार्ड संख्या 17 दर्ज कर दी गई थी।
गंगापुरसिटी में कांग्रेस जिला सचिव की पत्नी ने किया निर्दलीय नामांकन
गंगापुरसिटी के वार्ड 12 में कांग्रेस के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई है। कांग्रेस के जिला सचिव रविकांत मिश्रा की पत्नी अनुराधा ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन पत्र दाखिल कर दिया है। गौरतलब है कि रविकांत मिश्रा स्वयं वार्ड 21 से कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। कांग्रेस ने वार्ड 12 से प्रियंका शर्मा को अधिकृत उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंदिरा मीना के अनुसार, नाम वापसी की समय-सीमा समाप्त होने के बाद बागी रुख अपनाने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बामनवास के सभी 20 वार्डों में बागियों ने बढ़ाई धड़कनें
बामनवास नगर पालिका के सभी 20 वार्डों में भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने-अपने अधिकृत प्रत्याशी उतारे हैं। हालांकि, टिकट न मिलने से नाराज आधा दर्जन से अधिक वार्डों में दोनों दलों के कार्यकर्ता निर्दलीय के तौर पर मैदान में डट गए हैं। प्रत्याशियों की घोषणा के बाद अब दोनों ही प्रमुख दलों के शीर्ष नेतृत्व के सामने नाम वापसी की अंतिम तिथि से पहले अपने-अपने बागियों को मनाने की कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।









