तेलंगाना में छात्रों का शक्ति प्रदर्शन, 59 पॉलिटेक्निक कॉलेजों से जुड़े लोगों ने उठाई आवाज

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तेलंगाना: दिल्ली से शुरू हुए 'जेन-जी' छात्र आंदोलनों से प्रेरणा लेते हुए तेलंगाना में भी पॉलिटेक्निक छात्रों ने राज्य की कांग्रेस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सिकंदराबाद स्थित संगीत एक्स रोड्स पर बड़ी संख्या में एकत्र होकर छात्रों ने राज्य सरकार द्वारा जारी 'जीओ 97' (Government Order 97) को बिना शर्त वापस लेने की मांग को लेकर उग्र प्रदर्शन किया।

धरना चौक पर हुआ बड़ा प्रदर्शन, प्रशासनिक बदलाव का विरोध

इससे पूर्व, तेलंगाना पॉलिटेक्निक स्टूडेंट्स जेएसी के बैनर तले धरना चौक पर एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। इसमें राज्य के 59 सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजों के छात्र-छात्राएं, पूर्व छात्र, अभिभावक और सेवानिवृत्त कर्मचारी शामिल हुए:

  • क्या है जीओ 97?: यह आदेश राज्य के पॉलिटेक्निक कॉलेजों के मौजूदा प्रशासनिक ढांचे में पुनर्गठन और फेरबदल से संबंधित है।

  • छात्रों की आशंका: छात्रों का मानना है कि प्रशासनिक बदलाव से पॉलिटेक्निक शिक्षा का स्वतंत्र अस्तित्व कमजोर होगा। द्वितीय वर्ष की छात्रा श्रावणी के अनुसार, भले ही सरकार वाईआईएसयू (YISU) में सीधे विलय की बात से इनकार कर रही हो, परंतु इस आदेश के तहत उन्हें वाईआईएसयू के इकोसिस्टम में लाने का प्रावधान है, जिससे उनके भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

पीपीपी मॉडल और निजीकरण पर उठाए सवाल

छात्रों ने प्रस्तावित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) पर गंभीर चिंता व्यक्त की है:

  • मुनाफे को प्राथमिकता का डर: छात्र प्रतिनिधि नवीन रेड्डी ने कहा कि निजी कंपनियों और संगठनों के हस्तक्षेप से विश्वविद्यालय एवं कॉलेजों के संचालन में शैक्षणिक हितों की तुलना में व्यावसायिक मुनाफे को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग: प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि इस नीति की समीक्षा कर रही उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को अविलंब सार्वजनिक किया जाए।

विपक्षी दलों का समर्थन और आंदोलन तेज करने की चेतावनी

छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जीओ 97 को शीघ्र निरस्त नहीं किया गया, तो वे तेलंगाना विधानसभा और राज्य सचिवालय का घेराव करेंगे। इस आंदोलन को राजनीतिक व सामाजिक संगठनों का भी समर्थन मिल रहा है:

  • बीआरएस का रुख: भारत राष्ट्र समिति (BRS) ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की बात कही है।

  • अन्य संगठनों का सहयोग: विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से तकनीकी शिक्षा प्रणाली की रक्षा करने का आग्रह किया है।