कालीघाट मंदिर में मछली का भोग खाते दिखे शुभेंदु, बंगाल की परंपरा पर दिया बड़ा संदेश

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कोलकाता (पश्चिम बंगाल)। दुर्गा पूजा पर्व के दौरान मांसाहारी भोजन के प्रयोग पर बागेश्वर धाम के कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की टिप्पणी से गरमाई राजनीति के बीच नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने पारंपरिक बंगाली अंदाज में पलटवार किया है। उन्होंने प्रसिद्ध कालीघाट काली मंदिर में मां काली को चढ़ाया गया मछली का विशेष भोग ग्रहण किया। इस दौरान उन्होंने व्यक्तिगत मान्यताओं और सामाजिक परंपराओं के अंतर को रेखांकित किया।

कौशिकी अमावस्या पर पूजा के बाद ग्रहण किया विशेष महाप्रसाद

कौशिकी अमावस्या के पावन अवसर पर शुभेंदु अधिकारी शाम को कालीघाट मंदिर दर्शन करने पहुंचे थे। वहां पूजा-अर्चना के उपरांत उन्होंने मंदिर परिसर में बैठकर बसंती पुलाव, मछली का मूरा और तली हुई मछली का प्रसाद ग्रहण किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथावाचक ने केवल अपनी व्यक्तिगत राय प्रकट की थी, जिसे किसी पर अनिवार्य रूप से लागू नहीं किया जा सकता।

'संत को विचार रखने का अधिकार, मानने के लिए जनता स्वतंत्र'

शुभेंदु अधिकारी ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए कहा कि किसी भी संत अथवा धर्मगुरु को अपने विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता है, लेकिन आम नागरिक उसे अपनाने या अस्वीकार करने के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि वे स्वयं सात्विक आहार और पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हैं, लेकिन बंगाल की विविध सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं में मां काली को मछली और मांस अर्पित करने की पौराणिक प्रथा रही है।

तस्वीरें जलाने वालों पर कार्रवाई के निर्देश, तुष्टीकरण के खिलाफ सख्त रुख

इससे पूर्व, विधानसभा सत्र के दौरान उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को उन असामाजिक तत्वों को अविलंब गिरफ्तार करने का निर्देश दिया, जिन्होंने विगत दिनों भवानीपुर पुलिस स्टेशन के बाहर कथावाचक की तस्वीरों को जलाया था। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राज्य में राष्ट्रवाद और धार्मिक स्वतंत्रता का सम्मान होगा तथा अराजकता या तुष्टीकरण की राजनीति को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बंगाल की सांस्कृतिक पहचान और खान-पान पर राजनीतिक बयानबाजी तेज

उधर, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने भी स्पष्ट किया कि राज्य की खान-पान परंपराएं और सांस्कृतिक विविधता अक्षुण्ण हैं। वहीं, कांग्रेस प्रतिनिधियों ने विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए स्थानीय परंपराओं के सम्मान की बात कही है। फिलहाल कालीघाट मंदिर में अधिकारी द्वारा भोग ग्रहण किए जाने की घटना पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बनी हुई है।