शरीर ने दिया जवाब, हौसले ने नहीं! अस्पताल से बूथ पहुंचे बुजुर्ग ने निभाया मतदान का फर्ज

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कोटपूतली-बहरोड़| कोटपूतली-बहरोड़ जिले में नगरीय निकाय चुनाव के दूसरे चरण के तहत शुक्रवार सुबह से ही मतदान प्रक्रिया शुरू हो गई है। बहरोड़ नगर परिषद सहित नीमराना और बर्डोद नगरपालिकाओं में सुबह 7 बजे से मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करने पहुंचे। शाम 6 बजे तक चलने वाले इस मतदान को लेकर सुबह से ही पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लंबी कतारें देखी गईं।

बहरोड़ के 55 वार्डों में 301 प्रत्याशी मैदान में, निर्दलीयों ने बिगाड़ा गणित

बहरोड़ नगर परिषद क्षेत्र के 55 वार्डों के लिए कुल 69 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जहां 66,896 मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करेंगे। इस चुनावी दंगल में कुल 301 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। मुख्य मुकाबले में भाजपा के 52, कांग्रेस के 48 और बहुजन समाज पार्टी का 1 प्रत्याशी मैदान में है। इसके अतिरिक्त 200 निर्दलीय प्रत्याशियों के चुनावी ताल ठोकने से कई वार्डों में मुकाबला बेहद दिलचस्प और बहुकोणीय हो गया है।

सुबह से ही बूथों पर जुटी भीड़, प्रत्याशियों की निगाहें वोटिंग प्रतिशत पर

वोटिंग प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही कई केंद्रों पर नागरिक जुटना शुरू हो गए थे। बुजुर्गों और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ कतार में लगकर अपना वोट डाला। राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के प्रतिनिधि मतदान प्रतिशत पर बारीक नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि अधिक से अधिक मतदान ही प्रत्याशियों के जीत-हार का रुख तय करेगा।

पैरालिसिस से पीड़ित बुजुर्ग ने दिखाई मिसाल, अस्पताल से आकर किया मतदान

बहरोड़ के वार्ड क्रमांक 40 (बूथ संख्या 47) पर लोकतंत्र के प्रति अटूट आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। पैरालिसिस की बीमारी से जूझ रहे एक बुजुर्ग मतदाता को सीधे अस्पताल से एंबुलेंस/वाहन के जरिए वोट डालने लाया गया। गंभीर शारीरिक अस्वस्थता के बावजूद उनका मतदान केंद्र पहुंचकर वोट डालना अन्य मतदाताओं के लिए बड़ी प्रेरणा बना और लोगों ने उनके इस जज्बे की सराहना की।

कड़े सुरक्षा घेरे में शांतिपूर्ण मतदान, शाम 6 बजे ईवीएम में बंद होगी किस्मत

प्रशासन ने पूरे जिले में निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों और मतदान केंद्रों पर पुलिस बल तैनात है। शाम 6 बजे वोटिंग खत्म होने के बाद सभी 55 वार्डों के उम्मीदवारों का भविष्य ईवीएम मशीनों में कैद हो जाएगा।