‘क्यों उठा भरोसा?’ छात्रों से राहुल गांधी का सीधा सवाल, शिक्षा व्यवस्था पर छिड़ी बहस

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नई दिल्ली| लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को देश की मौजूदा शिक्षा प्रणाली पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह व्यवस्था उसी युवा पीढ़ी को निराश कर रही है, जिसके विकास के लिए इसे तैयार किया गया था। उन्होंने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' के जरिए देश भर के छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से संवाद की अपील की और पूछा कि आखिर इस व्यवस्था से उनका विश्वास क्यों उठ गया है।

पेपर लीक, अत्यधिक फीस और जर्जर ढांचे का उठाया मुद्दा

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में देश के करोड़ों युवाओं की समस्याओं को रेखांकित करते हुए लिखा कि पेपर लीक, बेतहाशा बढ़ती फीस और बदहाल आधारभूत संरचना जैसी खामियां लाखों मेहनती युवाओं के भविष्य को अंधकार में ढकेल रही हैं। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से प्रयास करने के बावजूद मौजूदा ढांचा युवाओं को निराश कर रहा है। इसे ठीक करने का पहला कदम उन लोगों के अनुभवों, साक्ष्यों और सुझावों को सुनना है जो रोजाना इन समस्याओं से जूझते हैं। इसके लिए उन्होंने एक ऑनलाइन लिंक भी साझा किया।

19 सितंबर को इंदौर में आयोजित होगा 'छात्रों की गूंज' का पांचवां संस्करण

कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी उनके राष्ट्रव्यापी अभियान 'छात्रों की गूंज' के पांचवें संस्करण से पहले आई है, जिसका आयोजन 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए देश के प्रत्येक छात्र की आवाज और उसके दर्द को सुनना अत्यंत आवश्यक है।

कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे के बाद अब इंदौर में छात्रों से संवाद

राहुल गांधी अब तक देश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों जैसे कोटा, देहरादून, प्रयागराज और पुणे में 'छात्रों की गूंज' के चार सफल कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। पुणे में 22 अगस्त को हुआ पिछला सत्र विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित किया गया था।

'जेन जी' और युवाओं से सीधा संवाद स्थापित करने की कवायद

देश की युवा पीढ़ी (जेन जी) को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि आज एक जर्जर शिक्षा प्रणाली ने युवाओं की उम्मीदों को गहरा आघात पहुंचाया है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे वीडियो संदेशों और लिखित सुझावों के माध्यम से अपनी समस्याओं को उनके साथ साझा करें, ताकि मिलकर एक बेहतर और उम्मीदों से भरी व्यवस्था का निर्माण किया जा सके।