राष्ट्रपति के साथ साए की तरह रहते थे मेजर ऋषभ, फिर अचानक क्यों लिया प्रीमैच्योर रिटायरमेंट?

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नई दिल्ली|भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूर्व एडीसी (ऐड-डी-कैंप) मेजर ऋषभ सिंह सांब्याल ने अपनी सेवा से समय पूर्व सेवानिवृत्ति (इस्तीफा) देकर हर किसी को अचंभित कर दिया था। उनके इस कदम को लेकर सोशल मीडिया और आम जनमानस में तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब स्वयं मेजर ऋषभ ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान अपनी सैन्य सेवा छोड़ने के पीछे के वास्तविक कारणों का खुलासा करते हुए सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है।

'राष्ट्रपति के एडीसी के रूप में खोई निजी जिंदगी, परिवार से रहना पड़ता था दूर'

मेजर ऋषभ ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि राष्ट्रपति के एडीसी पद के अपने कड़े नियम और सीमाएं होती हैं। इस पद पर तैनात अधिकारी विवाह नहीं कर सकता और उसे अपने परिवार व निजी जीवन से दूर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि एक आम नागरिक की तरह बाहर घूमना या निजी जीवन का आनंद लेना संभव नहीं था। कई बार वे एकाकीपन महसूस करते थे, जिसे बाद में उन्होंने सहजता से स्वीकार कर लिया।

'परिवार के प्रति जिम्मेदारियां बनीं फैसले का आधार, माता-पिता के लिए किया त्याग'

इस्तीफे के मुख्य कारण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वे अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र हैं और परिवार के प्रति उनकी कुछ अनिवार्य प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने कहा, "मैं हमेशा से वर्दी पहनना और लोगों को प्रेरित करना चाहता था, जिसे मैंने 30 वर्ष की आयु तक देश की सेवा करके पूरा किया। लेकिन अब जब मेरे माता-पिता को मेरी आवश्यकता है, तो मैं अपनी नैतिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हट सकता था। अपने माता-पिता के लिए किया गया त्याग मेरे लिए सबसे बड़ा है।"

अचानक मिला था एडीसी बनने का अवसर, चुनौतीपूर्ण रहा सफर

अपने चयन प्रक्रिया का स्मरण करते हुए मेजर ऋषभ ने बताया कि जब वे किसी अन्य देश की सेना के साथ संयुक्त युद्धाभ्यास में शामिल थे, तब उनके कमांडिंग ऑफिसर ने उन्हें एडीसी पद के लिए शॉर्टलिस्ट होने की जानकारी दी थी। शुरुआत में संकोच के बावजूद वरिष्ठ अधिकारियों व शुभचिंतकों की सलाह पर उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह फैसला कठिन था, लेकिन परिवार और कर्तव्य के मध्य संतुलन बनाने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया।